March 6, 2026

हंसपुर कांड: अवैध बॉक्साइट, प्रशासनिक गुंडागर्दी और आदिवासी की मौत — सत्ता के संरक्षण में खून!

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छत्तीसगढ़ – बलरामपुर जिले के कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम हंसपुर में अवैध बॉक्साइट उत्खनन की जांच के दौरान जो कुछ हुआ, उसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासनिक अमले पर ग्रामीणों से बेरहमी से मारपीट का आरोप है, जिसमें 60 वर्षीय आदिवासी बुजुर्ग की मौत हो गई और दो अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हैं। घटना के बाद आदिवासी समाज सड़कों पर उतर आया है और पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है।

ट्रक पकड़ा गया, तंत्र बौखलाया

ग्रामीणों का आरोप है कि हंसपुर क्षेत्र में लंबे समय से अवैध बॉक्साइट उत्खनन चल रहा था। देर रात जब बॉक्साइट से लदा ट्रक ग्रामीणों ने पकड़ा, तो खनन माफिया नहीं — प्रशासन दौड़ता हुआ पहुंचा।
आरोप है कि एसडीएम और नायब तहसीलदार बिना सुरक्षा बल, कुछ स्थानीय युवकों के साथ मौके पर पहुंचे।

खेत से लौटते ग्रामीण बने शिकार

घायल आकाश अगरिया और अजीत उरांव का बयान चौंकाने वाला है।
रात करीब 8 बजे गेहूं की सिंचाई कर लौट रहे थे। सरना स्थल के पास रोका गया। पूछताछ के नाम पर अचानक लाठी-डंडे, लात-घूंसे चलने लगे। आरोप है कि अधिकारियों के साथ मौजूद 6–7 युवक भी मारपीट में शामिल थे।

जबरन उठाया, रास्ते में टूटी सांस मारपीट के बाद तीनों को जबरन वाहन में डालकर कुसमी ले जाया जा रहा था। रास्ते में राम नरेश राम (60) की हालत बिगड़ी, बेहोश हो गए। CHC कुसमी लाया गया, फिर मेडिकल कॉलेज अंबिकापुर रेफर कर दिया । लेकिन 16 फरवरी 2026, रात 00:14 बजे राम नरेश की मौत हो गई।

जांच या संरक्षण?

सूत्र कहते हैं — राजस्व टीम जांच के लिए पहुंची थी। ग्रामीण कहते हैं — अवैध खनन प्रशासन के संरक्षण में चल रहा था, और ट्रक निकालने के लिए ही यह पूरा खेल रचा गया। खेत से लौटते निर्दोष ग्रामीणों को “संदेह” के नाम पर पीटा गया।

कानूनी मोड़: नामजद FIR

आदिवासी समाज के दबाव में आखिरकार थाना कोरंधा में FIR दर्ज हुई।
मर्ग जांच, चश्मदीद, घायलों के बयान और पोस्टमॉर्टम के आधार पर मामला पंजीबद्ध।
नामजद आरोपी —
करूण डहरिया SDM
विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह
मंजीत कुमार यादव
सुदीप यादव

धाराएं: BNS 103(1), 115(2), 3(5)

पुलिस का बयान

पुलिस अधीक्षक का कहना है कि “पोस्टमॉर्टम से मौत का कारण स्पष्ट होगा, विवेचना जारी है।” लेकिन सवाल यह है कि जब आरोपी SDM है, क्या कानून भी रुक जाता है? हंसपुर कांड ने प्रशासन, पुलिस और खनन तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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