April 24, 2026

देखिए वीडियों: भाजपा की कलह सरेआम फूटी, महोत्सव बना रणभूमि — मंत्री के सामने बवाल, गुस्से में उखड़ा कार का बोर्ड

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बिप्लव दत्ता

रायपुर – छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी भाजपा की अंदरूनी जंग अब पर्दे के पीछे नहीं रही, बल्कि खुले मंच पर तमाशा बन चुकी है। ऊपर से लेकर नीचे तक फैली गुटबाजी अब सरकारी और सांस्कृतिक आयोजनों की गरिमा को रोज़ कुचल रही है। ताज़ा और सनसनीखेज मामला मनेंद्रगढ़ में आयोजित अमृत धारा महोत्सव से सामने आया है, जहां भाजपा नेताओं के बीच हुआ टकराव पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

प्रवेश द्वार पर अपमान, अंदरूनी जंग सड़कों पर आई

महोत्सव के दौरान नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिमा यादव और मंत्री के विधायक प्रतिनिधि सूरज यादव को कार्यक्रम स्थल में प्रवेश से रोक दिया गया। सूत्रों के मुताबिक, यह रोक सुरक्षा या प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि सत्ता के भीतर चल रही गुटबाजी का नतीजा थी।

बोर्ड उखाड़कर फेंका

अपमान से बौखलाए विधायक प्रतिनिधि सूरज यादव का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने कार से बोर्ड उखाड़कर सड़क पर फेंक दिया। इसके बाद वे नगर पालिका अध्यक्ष के साथ कार्यक्रम छोड़कर लौट गए। यह दृश्य न सिर्फ चौंकाने वाला था, बल्कि भाजपा की अंदरूनी हालत को आईना दिखाने के लिए काफी था।

“नाम की जरूरत नहीं… आज हैं, कल चले जाएंगे”

विधायक प्रतिनिधि सूरज यादव ने बेहद तीखे और सियासी बयान देते हुए कहा— “मंच पर हमारे नाम की कोई जरूरत नहीं है। क्या इनके दम पर हमने नाम कमाया है? आज यहां हैं, कल चले जाएंगे।”

उन्होंने साफ कहा कि वे मंत्री के साथ ही कार्यक्रम में आ रहे थे, लेकिन आगे-पीछे होने का बहाना बनाकर उन्हें रोका गया। यादव ने यह भी जोर देकर कहा कि— वे कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे। और नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षद भी मौजूद थे। इसके बावजूद उन्हें जानबूझकर अपमानित किया गया

सवालों के घेरे में भाजपा का अनुशासन

इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा के अनुशासन, संगठन और नेतृत्व क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पार्टी ने “सुशासन और अनुशासन” को अपनी पहचान बताया, वही पार्टी आज अपने ही नेताओं को मंच से भगाने की स्थिति में पहुंच चुकी है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि—यह घटना सिर्फ एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं.. यह भाजपा के भीतर चल रही सत्ता की खींचतान का विस्फोट है.अगर समय रहते शीर्ष नेतृत्व ने हस्तक्षेप नहीं किया, तो ऐसे दृश्य आम होते जाएंगे।

अमृत धारा महोत्सव में हुआ यह बवाल अब सिर्फ स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि भाजपा की अंदरूनी सियासत का सनसनीखेज चेहरा बन चुका है।

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