March 7, 2026

प्रदेश के जंगल में तेंदुए की हत्या, शिकारी पंजे, नाखून और जबड़े के दांत काट ले गए

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छत्तीसगढ़ – खैरागढ़-डोंगरगढ़ अंचल के जंगलों से वन्यजीव संरक्षण को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है। यहां के बनबोड़ वन ग्राम क्षेत्र में एक वयस्क तेंदुए की निर्मम हत्या कर दी गई। शिकारी तेंदुए के पंजे, नाखून और जबड़े के दांत काटकर ले गए, जिससे संगठित अवैध शिकार की आशंका गहरा गई है। जंगल से कुछ दूरी पर शव मिलने से वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार खैरागढ़ वनमंडल के कोपेनवागांव-मुढ़ीपार क्षेत्र में सोमवार,15 दिसंबर को सुबह तेंदुए का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया। जंगल से कुछ दूरी पर राजस्व भूमि में शव के मिलने से  पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। ग्रामीणों ने सोमवार सुबह तेंदुए को मृत अवस्था में देखकर तत्काल वन विभाग को सूचना दी। इसके बाद विभागीय अमला मौके पर पहुंचा और घटनास्थल का निरीक्षण किया।

शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। तेंदुए के चारों पैरों के नाखून गायब थे और उसका जबड़ा भी शव के पास नहीं मिला। वारदात स्थल पर खून के धब्बे पाए गए हैं, जिससे यह आशंका गहराती जा रही है कि तेंदुए की हत्या कहीं और की गई और बाद में शव को यहां लाकर फेंका गया। इस मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, वहीं घटनास्थल को सुरक्षा बलों के साथ सील कर दिया गया है। वारदात की गंभीरता को देखते हुए जांच में डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है और आसपास के गांवों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग द्वारा वन्यजीव संरक्षण नियमों के तहत तेंदुए का पोस्टमार्टम कराया गया है। अफसरों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा।

वन परिक्षेत्राधिकारी आरके टंडन ने बताया कि सीनियर अफसरों के निर्देश पर सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और यदि अवैध शिकार या आपराधिक गतिविधि की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तेंदुए की मौत की खबर से क्षेत्र के ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में गुस्सा है।

वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो खैरागढ़-डोंगरगढ़ के जंगलों से वन्यजीवों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। स्थानीय लोग वन विभाग से ठोस कार्रवाई और स्थायी निगरानी तंत्र की मांग कर रहे हैं, ताकि जंगलों में बेखौफ घूम रहे शिकारियों पर अंकुश लगाया जा सके।

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