March 7, 2026

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: सुप्रीम कोर्ट से अरुण पति त्रिपाठी को मिली नियमित जमानत,लेकिन जेल से नहीं निकल पाएंगे बाहर

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AP-TRIPATHI

रायपुर – छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आरोपी छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है. कोर्ट ने अरुण पति त्रिपाठी को नियमित जमानत दे दिया है. हालांकि अरुण पति त्रिपाठी उसके बाद भी जेल से बाहर नही आएंगे क्योंकि अरुण पति त्रिपाठी के खिलाफ ईओडब्ल्यू में एक और मुकदमा चल रहा है.

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टिन मसीह की पीठ ने कहा कि पीएमएलए कानून के प्रावधानों का उपयोग किसी को हमेशा के लिए जेल में रखने के लिए नहीं किया जा सकता हैं. कोर्ट ने ईडी के फटकार लगाते हुए कहा कि दहेज कानून (498A) की तरह पीएमएलए का भी दुरुपयोग हो रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस मामले में सेशन कोर्ट के द्वारा संज्ञान लेने के फैसले को रद्द कर दिया था.

उसके बावजूद जेल में रखने का क्या औचित्य है. पिछली सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने ईडी द्वारा दायर हलफनामे पर सवाल उठाया था. एएसजी राजू ने कहा था कि ईडी में कुछ गड़बड़ चल रही है. बिना मेरे परामर्श के एक आधा-अधूरा हलफनामा हमारे पेश होने से पहले ही दाखिल किया गया है. जिसपर कोर्ट ने कहा था कि यह गंभीर मामला है.

बतादें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने अरुण पति त्रिपाठी की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने उनके कुछ व्हाट्सएप चैट पर गंभीर आपत्ति जताई, जहां उन्होंने मामले के अन्य आरोपियों के साथ आधिकारिक होलोग्राम टेंडर दस्तावेज साझा किए थे. कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि हम आपको तुरंत जमानत दे सकते थे, लेकिन हम दो कारणों से ऐसा नही कर रहे हैं.

आपको अनवर ढेबर के साथ होलोग्राम साझा करने का क्या काम था और वह फिर इसे अनिल टुटेजा को भेजता है. प्रवर्तन निदेशालय ने शराब घोटाले मामले में मई 2023 में आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और शराब कंपनी सीएसएमसीएल के पूर्व एमडी अरुण पति त्रिपाठी को गिरफ्तार किया था. अरुण पति त्रिपाठी छत्तीसगढ़ सरकार के आबकारी विभाग के विशेष सचिव रहे है. पहले वे छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एमडी भी रहे है.

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