इज़राइल भेजी जाएंगी नर्सें या घरेलू सहायिकाएं? कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
रायपुर – छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से इज़राइल में “होम-केयरगिवर” पदों पर भर्ती को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने राज्यपाल को पत्र लिखकर इस पूरी भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्रशिक्षित नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों को विदेश में घरेलू कामकाज के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है, जो न केवल नर्सिंग पेशे की गरिमा के खिलाफ है बल्कि उनकी सुरक्षा और सम्मान से भी जुड़ा गंभीर विषय है।
डॉ. गुप्ता ने राज्यपाल को भेजे पत्र में कहा है कि कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा जारी विज्ञापन में जीएनएम, बीएससी नर्सिंग, पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग, नर्स असिस्टेंट और अन्य स्वास्थ्य संबंधी योग्यताधारी अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए पात्र बताया गया है। लेकिन जब विज्ञापन में दिए गए कार्यों का विवरण देखा जाता है तो उसमें मरीजों की देखभाल के साथ-साथ खाना बनाना, घर की सफाई करना, कपड़े धोना, खरीदारी करना और अन्य घरेलू कार्य भी शामिल हैं।
नर्सिंग की डिग्री लेकर झाड़ू-पोंछा करेंगे स्वास्थ्यकर्मी?
कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जिन युवाओं ने वर्षों तक कठिन प्रशिक्षण लेकर नर्सिंग की पढ़ाई की है, क्या उन्हें विदेश भेजकर घरेलू सहायिका या घरेलू नौकर की भूमिका में काम करवाना उचित है? डॉ. गुप्ता का कहना है कि नर्सिंग एक सम्मानित और पेशेवर स्वास्थ्य सेवा है, जिसका उद्देश्य मरीजों की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य संबंधी देखभाल करना है, न कि घरेलू कार्य करना।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशिक्षित नर्सों से घर की सफाई, कपड़े धोने और अन्य घरेलू काम कराए जाते हैं तो यह उनके पेशेवर कौशल का अपमान और नर्सिंग पेशे की गरिमा पर सीधा हमला होगा।
“स्पेशल ड्यूटी” के नाम पर क्या-क्या करवाया जाएगा?
विज्ञापन में प्रयुक्त “Special Duties” और “Employer Requirement” जैसे शब्दों पर भी कांग्रेस ने कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि इन शब्दों की स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई है, जिससे कार्यक्षेत्र असीमित हो सकता है और कर्मचारियों के शोषण का रास्ता खुल सकता है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी से नर्सिंग सेवा के बजाय घरेलू कार्य करवाए जाते हैं तो यह उसके श्रम अधिकारों और पेशेवर अधिकारों का उल्लंघन होगा।

इज़राइल की सुरक्षा स्थिति पर भी उठे सवाल
कांग्रेस ने इस भर्ती प्रक्रिया के सबसे संवेदनशील पहलू के रूप में इज़राइल की वर्तमान सुरक्षा स्थिति को बताया है। पत्र में कहा गया है कि इज़राइल पिछले कई वर्षों से युद्ध, सैन्य संघर्ष और सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में बड़ी संख्या में भारतीय स्वास्थ्यकर्मियों, विशेषकर महिलाओं को भेजना उनकी सुरक्षा के दृष्टिकोण से चिंता का विषय है।
डॉ. गुप्ता ने पूछा है कि क्या राज्य सरकार ने इस भर्ती से पहले विस्तृत सुरक्षा मूल्यांकन कराया है? क्या अभ्यर्थियों के लिए आपातकालीन निकासी योजना, जीवन बीमा, स्वास्थ्य बीमा, कानूनी सहायता और भारतीय दूतावास की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं?
90 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए, सुरक्षा का क्या इंतजाम?
विज्ञापन के अनुसार अधिकांश पद महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। कांग्रेस का कहना है कि ऐसे में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और कार्यस्थल पर संभावित उत्पीड़न से संरक्षण के लिए विशेष प्रावधानों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। पत्र में यह भी पूछा गया है कि क्या महिला अभ्यर्थियों के लिए शिकायत निवारण तंत्र, हेल्पलाइन और कानूनी संरक्षण की कोई स्पष्ट व्यवस्था बनाई गई है या नहीं।
देश में नर्सों की कमी, फिर विदेश में घरेलू कार्यों के लिए क्यों?
कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया है कि भारत में पहले से प्रशिक्षित नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता बनी हुई है। ऐसे में उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय घरेलू देखभाल और घरेलू कार्यों के लिए विदेश भेजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य संसाधनों का दुरुपयोग माना जा सकता है। पत्र में कहा गया है कि भारतीय नर्सिंग परिषद की भावना और नर्सिंग शिक्षा के मूल उद्देश्य के विपरीत जाकर प्रशिक्षित नर्सों को घरेलू सहायिका जैसी भूमिका में नहीं धकेला जाना चाहिए।

राज्यपाल से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
डॉ. राकेश गुप्ता ने राज्यपाल से मांग की है कि इस भर्ती प्रक्रिया की तत्काल समीक्षा कराई जाए और नर्सिंग योग्यताधारी अभ्यर्थियों से घरेलू कार्य करवाने वाले प्रावधानों को हटाया जाए। साथ ही नर्सिंग पेशे की गरिमा की रक्षा के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं। उन्होंने मांग की है कि भर्ती प्रक्रिया में कार्यों की स्पष्ट परिभाषा, सुरक्षा प्रावधान, बीमा सुविधा, कानूनी संरक्षण, आपातकालीन सहायता व्यवस्था और भारतीय नर्सिंग परिषद से परामर्श की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
राजनीतिक मुद्दा बनने के संकेत
कांग्रेस द्वारा राज्यपाल को लिखे गए इस पत्र के बाद यह मामला राजनीतिक रूप ले सकता है। एक तरफ सरकार इसे विदेशी रोजगार का अवसर बता रही है, वहीं विपक्ष इसे प्रशिक्षित नर्सों के सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार को घेरने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की संभावना जताई जा रही है।
अब बड़ा सवाल यही है—क्या छत्तीसगढ़ की प्रशिक्षित नर्सों को स्वास्थ्य सेवा के लिए भेजा जा रहा है या फिर घरेलू कामकाज के लिए? और क्या उनकी सुरक्षा तथा सम्मान की पूरी गारंटी सरकार दे पाएगी?

