April 23, 2026

जमानत के बाद दबंगई! रेप के आरोपी को कांग्रेस नेता का संरक्षण, केस वापस लेने का दबाव, पुलिस ने झाड़ा पल्ला—पीड़िता भटकी न्याय के लिए

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रायगढ़ – शहर में एक सनसनीखेज मामला अब गंभीर मोड़ लेता जा रहा है, जहां दुराचार की शिकार एक युवती न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। आरोपी बादल सिंह राजपूत, जो पहले से ही आपराधिक छवि वाला बताया जा रहा है, जमानत पर बाहर आते ही कानून को ठेंगा दिखाते हुए पीड़िता पर केस वापस लेने का दबाव बना रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे खेल में उसका साथ देने का आरोप एक कांग्रेसी नेता अनमोल अग्रवाल पर भी लग रहा है।

पीड़िता ने साफ आरोप लगाया है कि जमानत मिलने के बाद से बादल राजपूत लगातार उसे धमका रहा है और अपने राजनीतिक रसूख वाले मित्र अनमोल अग्रवाल के जरिए समझौते के लिए दबाव बनवा रहा है। युवती ने हिम्मत दिखाते हुए महिला थाना और सिटी कोतवाली में इसकी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन वहां से उसे जो जवाब मिला, उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कोतवाली पुलिस ने यह कहकर हाथ खड़े कर दिए कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए वे हस्तक्षेप नहीं कर सकते। पुलिस ने पीड़िता को सीधे कोर्ट जाने की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। सवाल यह है कि क्या कानून का मतलब सिर्फ कागजी प्रक्रिया रह गया है? क्या पीड़िता की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है?

कानून के जानकारों का कहना है कि यदि कोई आरोपी जमानत पर बाहर आने के बाद पीड़िता को प्रभावित करने, धमकाने या केस वापस लेने के लिए दबाव बनाता है, तो यह सीधे-सीधे न्यायालय के आदेश का उल्लंघन है। ऐसे में पुलिस को तुरंत नया मामला दर्ज कर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन यहां उल्टा पीड़िता को ही भटकने के लिए छोड़ दिया गया।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि प्रभावशाली लोगों के सामने कानून कितना कमजोर पड़ जाता है। जहां एक ओर सरकार महिलाओं की सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

अब पीड़िता ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर उसे स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला, तो वह मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग का दरवाजा खटखटाएगी। यह मामला अब सिर्फ एक युवती के साथ हुए अन्याय का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का बन चुका है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या आरोपी की दबंगई यूं ही चलती रहेगी? क्या पुलिस अपनी जिम्मेदारी निभाएगी या फिर पीड़िता को न्याय के लिए और लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी? रायगढ़ का यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनता जा रहा है।

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