माना कैम्प में मौत को दावत! 50 फीट ऊंचे बिजली पोल पर बिना हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट के काम, ठेकेदार की घोर लापरवाही उजागर – वीडियो
रायपुर/माना कैम्प – राजधानी रायपुर के माना कैम्प में इन दिनों बिजली लाइन सुधार का कार्य चल रहा है, लेकिन इस कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। ठेकेदार की लापरवाही का ऐसा नजारा सामने आया है जिसे देखकर हर कोई दंग रह जाए। करीब 40 से 50 फीट ऊंचे बिजली पोल पर कर्मचारी बिना हेलमेट, बिना सेफ्टी बेल्ट, बिना ग्लव्स और बिना किसी सुरक्षा उपकरण के जान जोखिम में डालकर काम करते दिखाई दिए।
वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कर्मचारी सीधे बिजली के पोल पर चढ़कर काम कर रहे हैं। यदि जरा सी चूक हो जाए तो पलभर में बड़ा हादसा हो सकता है। सवाल यह है कि आखिर कर्मचारियों की जान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
जानकारी के अनुसार, माना कैम्प के सिविल अस्पताल, PTS चौक और मछली मार्केट के आसपास बिजली लाइन सुधार का कार्य किया जा रहा है। मौके पर मौजूद कर्मचारियों के पास सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं था। न सिर पर हेलमेट, न शरीर पर सेफ्टी बेल्ट और न ही हाथों में इंसुलेटेड ग्लव्स। यह स्थिति सीधे तौर पर श्रमिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन मानी जा रही है।
जब इस पूरे मामले को लेकर मौके पर मौजूद कर्मचारियों से बातचीत करने की कोशिश की गई तो अधिकांश कर्मचारी कैमरे और सवालों से बचते नजर आए। कोई इधर-उधर भागने लगा तो कोई जवाब देने से बचता रहा। हालांकि कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वे ठेकेदार प्रणय बाजारी और कमल साहू के अधीन कार्य कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना था कि उन्हें किसी प्रकार का हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट या अन्य सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है, फिर भी मजबूरी में जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब ठेकेदार प्रणय बाजारी से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने पहले यह पूछा कि उनका मोबाइल नंबर किसने दिया। इसके बाद उन्होंने स्वयं को बाहर होने का हवाला दिया और बाद में मिलने की बात कहकर फोन काट दिया। सुरक्षा व्यवस्था पर पूछे गए सवालों का उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
इसके बाद जब इस पूरे मामले की जानकारी CSPDCL के संबंधित अधिकारियों को दी गई और वीडियो सहित पूरी स्थिति से अवगत कराया गया तो अधिकारी भी हैरान रह गए। उन्होंने तत्काल ठेकेदार को फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित की जाए। अधिकारी ने कहा कि “मीडिया के माध्यम से जानकारी मिली है कि सुरक्षा नियमों की अनदेखी की जा रही है। यदि तत्काल सुधार नहीं हुआ तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बिजली विभाग के कार्यों में सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है, तब आखिर बिना सुरक्षा उपकरणों के कर्मचारियों से काम क्यों कराया जा रहा है? क्या विभागीय अधिकारियों की निगरानी केवल कागजों तक सीमित है? यदि कोई बड़ा हादसा हो जाता तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
बिजली लाइन सुधार का उद्देश्य लोगों को बेहतर सुविधा देना है, लेकिन यदि इसी कार्य में कर्मचारियों की जान खतरे में डाल दी जाए तो यह गंभीर लापरवाही है। जिम्मेदार एजेंसियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में किसी कर्मचारी की जान इस तरह की लापरवाही की भेंट न चढ़े।
फिलहाल मीडिया द्वारा मामला उजागर होने के बाद विभाग हरकत में आया है, लेकिन अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या ठेकेदार पर वास्तव में कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी सिर्फ चेतावनी देकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।

