तेंदुवाधाम नृत्य महोत्सव बना लोक संस्कृति का महाकुंभ, 5 जिलों के कलाकारों ने बिखेरा प्रतिभा का रंग, हर वर्ष होगा त्रिदिवसीय आयोजन
जांजगीर /चांपा – शिवरीनारायण राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवाधाम में आयोजित तेंदुवाधाम नृत्य महोत्सव लोक कला, संस्कृति और ग्रामीण प्रतिभाओं का ऐसा भव्य संगम बनकर सामने आया, जिसने उपस्थित हर व्यक्ति के मन पर अमिट छाप छोड़ दी। पूरे आयोजन में लगभग एक हजार लोगों की उपस्थिति रही, जबकि पांच जिलों से आए 30 प्रतिभागियों ने अपनी अद्भुत कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में पामगढ़ विधानसभा की विधायिका शेषराज हरवंश की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा और बढ़ा दी।
इस महोत्सव में कोरबा, रायगढ़, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सक्ती तथा जांजगीर-चांपा जिले के कलाकारों ने भाग लिया। सभी प्रतिभागियों ने लोक संस्कृति की विविध रंगों से सजी प्रस्तुतियां देकर यह साबित कर दिया कि ग्रामीण अंचलों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवा कलाकारों तक ने ऐसा शानदार प्रदर्शन किया कि दर्शक देर तक तालियां बजाने को मजबूर हो गए। कई प्रस्तुतियां इतनी प्रभावशाली थीं कि लोगों को विश्वास ही नहीं हुआ कि गांवों के बच्चे इतनी उच्च स्तर की कला प्रस्तुत कर सकते हैं।
महोत्सव का सबसे आकर्षक केंद्र बस्तर अंचल के पारंपरिक लोक नृत्य रहे। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्यों की मधुर धुन और कलाकारों के बेहतरीन तालमेल ने पूरे वातावरण को लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। वहीं एक पिता और पुत्री की भावपूर्ण संयुक्त प्रस्तुति ने दर्शकों का दिल जीत लिया। इस प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि कला केवल मंच तक सीमित नहीं होती, बल्कि परिवार, संस्कार और परंपरा को भी एक सूत्र में बांधती है।
आयोजन के दौरान केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियां ही नहीं हुईं, बल्कि समाज में कला और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान देने वाले करीब 400 लोगों का सम्मान भी किया गया। सम्मान समारोह ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया। कलाकारों, समाजसेवियों, सहयोगियों और सांस्कृतिक क्षेत्र में सक्रिय लोगों को सम्मानित कर आयोजकों ने उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि लोक संस्कृति किसी भी समाज की पहचान होती है और इसे जीवित रखने के लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच देने के लिए राम मिलेंगे आश्रम के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक पहल बताया।
राम मिलेंगे आश्रम ने इस अवसर पर भविष्य को लेकर भी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। आश्रम संयोजक डॉक्टर अशोक हरिवंश ने घोषणा की कि अब “तेंदुवाधाम नृत्य महोत्सव” प्रत्येक वर्ष त्रिदिवसीय (तीन दिवसीय) आयोजन के रूप में मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य लोक संस्कृति को व्यापक मंच देना, ग्रामीण कलाकारों को नई पहचान दिलाना और प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना है।
इसके साथ ही आश्रम में लोक नृत्य प्रशिक्षण केंद्र खोलने की भी घोषणा की गई। इस प्रशिक्षण केंद्र में ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों और युवाओं को विभिन्न लोक नृत्यों का नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि उनकी प्रतिभा को निखारकर उन्हें बड़े मंचों तक पहुंचाया जा सके। यह पहल आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

पूरे आयोजन के दौरान “जय श्री राम” और “जय सिया राम” के उद्घोषों से वातावरण भक्तिमय और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर गया। कार्यक्रम में शामिल हजारों लोगों ने न केवल कलाकारों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि यह भी महसूस किया कि यदि ग्रामीण प्रतिभाओं को सही मंच और मार्गदर्शन मिले तो वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना सकते हैं।

राम मिलेंगे आश्रम, तेंदुवाधाम (शिवरीनारायण, जिला जांजगीर-चांपा) में आयोजित यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि लोक कला, सामाजिक सम्मान, सांस्कृतिक संरक्षण और नई पीढ़ी की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने का एक ऐतिहासिक अभियान बन गया। आयोजकों का संकल्प है कि आने वाले वर्षों में यह महोत्सव छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के प्रमुख लोक सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी विशेष पहचान बनाएगा।

