सरकारी अस्पतालों में नकली और अमानक दवाओं का बड़ा मामला! कांग्रेस ने राज्यपाल से की उच्चस्तरीय जांच की मांग
रायपुर – छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में गरीब मरीजों को वितरित की जा रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर कांग्रेस ने बड़ा आरोप लगाया है। पूर्व संसदीय सचिव विकास उपाध्याय के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को लोकभवन पहुंचकर राज्यपाल के नाम शिकायत सौंपते हुए छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) द्वारा अमानक, नकली और निम्न स्तरीय दवाओं की सप्लाई किए जाने का गंभीर आरोप लगाया। साथ ही पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की गई।
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता, प्रदेश महामंत्री कन्हैया अग्रवाल, पूर्व पार्षद मनोज कंदोई, डॉ. नरेंद्र भुवाल, वेद प्रकाश कुशवाहा और श्रीनाथ भोगल सहित अन्य नेता शामिल थे।
विकास उपाध्याय ने कहा कि पिछले कई महीनों से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को दी जा रही दवाओं की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन स्वयं समय-समय पर सर्कुलर जारी कर अपनी सप्लाई की गई दवाओं को ड्रग टेस्टिंग लैब की रिपोर्ट के आधार पर अमानक और निम्न स्तरीय घोषित कर वापस मंगाने के निर्देश देता रहा है। इससे यह संदेह और गहरा हो जाता है कि दवा खरीदी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किया गया है।

उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत डॉक्टरों, नर्सों और फार्मेसी स्टाफ द्वारा भी कई बार दवाओं और इंजेक्शनों के उपयोग के दौरान प्रतिकूल प्रभावों की शिकायतें सामने आई हैं। बावजूद इसके उच्च अधिकारियों द्वारा इन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया और संबंधित कर्मचारियों की आवाज दबाई जाती रही।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि अस्पतालों में दवाओं के भंडारण की व्यवस्था भी मानकों के अनुरूप नहीं है। कई दवाओं को आवश्यक तापमान और परिस्थितियों में सुरक्षित नहीं रखा जाता, जिससे उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता प्रभावित होती है।
स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी का मुद्दा उठाते हुए उपाध्याय ने कहा कि प्रदेश के अनेक अस्पतालों में जीवनरक्षक आईवी फ्लूड, नॉर्मल सलाइन (NS), DNS और RL महीनों से उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं और सिकल सेल बीमारी के मरीजों को दी जाने वाली फोलिक एसिड की गोलियों की भी भारी कमी बनी हुई है। सिकल सेल जांच के लिए आवश्यक किट भी अस्पतालों में उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने दावा किया कि उच्च रक्तचाप के मरीजों को दी जाने वाली एनालाप्रिल दवा की कई खेप शॉर्ट एक्सपायरी अवधि वाली हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। वहीं रेड क्रॉस संस्थाओं में मिलने वाली दवाओं के दाम भी मेडिकल स्टोरों के बराबर होने का आरोप लगाया गया। कांग्रेस ने रेड क्रॉस में दवा मूल्य निर्धारण की समीक्षा की मांग भी की है।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्य की स्वास्थ्य योजनाओं पर भी सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के तहत जरूरतमंद मरीजों को 10 लाख, 15 लाख और 20 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती थी, लेकिन वर्तमान सरकार में यह योजना लगभग बंद होने की स्थिति में पहुंच गई है।
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में कांग्रेस ने मांग की है कि पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन द्वारा की गई दवा खरीदी की विस्तृत जांच कराई जाए, निम्न स्तरीय दवाओं की खरीद और सप्लाई पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा दोषी अधिकारियों और कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राज्यपाल प्रदेश की जनता के संरक्षक हैं और उन्हें इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर गरीब मरीजों के हित में उच्चस्तरीय जांच के निर्देश देने चाहिए, ताकि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में जनता का भरोसा कायम रह सके।

