ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर सरकार की चुप्पी सवालों के घेरे में, कांग्रेस ने लगाया भ्रष्टाचार और मिलीभगत का आरोप
रायपुर – छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) में दवा आपूर्ति को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद सामने आया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि नकली दवाओं की आपूर्ति और ब्लैकलिस्टेड कंपनी को संरक्षण देने का मामला सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर संकेत करता है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि सीजीएमएससी की निविदा प्रक्रिया में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान है कि यदि किसी दवा कंपनी को किसी अन्य राज्य में ब्लैकलिस्टेड या अयोग्य घोषित किया जाता है तो उसे इसकी लिखित सूचना कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक (एमडी) को देना अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि दवा सप्लाई करने वाली यूनिक्योर कंपनी ने निर्धारित नियमों के तहत इसकी जानकारी सीजीएमएससी को विधिवत उपलब्ध कराई थी।
कांग्रेस नेता का कहना है कि जब कंपनी द्वारा स्वयं ब्लैकलिस्ट होने की सूचना दे दी गई, तब नियमों के अनुसार उसके विरुद्ध कार्रवाई कर उसे छत्तीसगढ़ में भी ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए था। लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जो गंभीर संदेह पैदा करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सूचना मिलने के बाद भी कार्रवाई नहीं करना भ्रष्टाचार में प्रत्यक्ष सहभागिता का प्रमाण माना जाना चाहिए।
डॉ. गुप्ता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में आवश्यक 400 दवाओं में से 184 दवाओं का अनुबंध एक ही ऐसी कंपनी को दिया गया, जिस पर अन्य राज्यों में कार्रवाई हो चुकी है। उनके अनुसार यह स्थिति निविदा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है और भाई-भतीजावाद तथा भ्रष्टाचार की आशंकाओं को बल देती है।
उन्होंने सीजीएमएससी के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा दिए गए उस तर्क को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया था कि अलग-अलग राज्यों में ब्लैकलिस्टिंग के नियम अलग-अलग होते हैं। डॉ. गुप्ता ने सवाल उठाया कि यदि कोई कंपनी देश के सात राज्यों में ब्लैकलिस्टेड हो चुकी है, तो आखिर छत्तीसगढ़ में उसे कैसे योग्य और विश्वसनीय माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब राज्य में लगातार नकली और घटिया गुणवत्ता की दवाओं को लेकर खबरें सामने आ रही हैं, तब इस प्रकार की कंपनियों को संरक्षण देना जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है।
कांग्रेस ने दवा कॉरपोरेशन के जनरल मैनेजर (टेक्निकल) की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। डॉ. गुप्ता का आरोप है कि भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों के बावजूद संबंधित अधिकारी को महत्वपूर्ण पद पर बनाए रखा गया है, जिससे पूरे मामले पर संदेह और गहरा हो गया है।
कांग्रेस ने राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को दिए गए अनुबंधों की समीक्षा करने की मांग की है। वहीं इस मुद्दे पर स्वास्थ्य विभाग और सीजीएमएससी की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

