June 2, 2026

छत्तीसगढ़िया मजदूरों से बड़ा धोखा? पावर प्लांट में बाहरी कंपनियों की मनमानी, श्रमिकों ने साय सरकार से लगाई न्याय की गुहार

0
Screenshot_20260602_132310_copy_800x536

जांजगीर / चांपा – छत्तीसगढ़ की धरती पर उद्योग लगाकर करोड़ों का मुनाफा कमाने वाली बाहरी कंपनियों पर अब स्थानीय मजदूरों के शोषण के गंभीर आरोप लगे हैं। जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा स्थित केएसके (JSW) पावर प्लांट नरियरा में काम करने वाले श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें वर्षों तक सेवा देने के बाद ठेका कंपनियों और सुरक्षा एजेंसियों की मिलीभगत से प्रताड़ित किया जा रहा है। इतना ही नहीं, श्रमिकों का दावा है कि उनके दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर उन्हें उनके कौशल से अलग जबरन मजदूरी का काम कराया जा रहा है।

मामला अब इंद्रावती भवन रायपुर स्थित श्रम आयुक्त कार्यालय तक पहुंच चुका है। पीड़ित मजदूरों ने लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है, लेकिन आरोप है कि आवेदन देने के बाद भी अब तक कोई ठोस सुनवाई नहीं हुई है। इससे मजदूरों और उनके परिवारों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

12 साल सेवा के बाद मिला शोषण का इनाम?

पीड़ित श्रमिक रोहित घृतलहरे ने श्रम आयुक्त को दिए आवेदन में बताया है कि वह वर्ष 2014 से केएसके पावर प्लांट नरियरा में कार्यरत हैं। पहले वे मैकनली भारत इंजीनियरिंग कंपनी में फील्ड ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे। बाद में ठेका बदलने पर उन्हें दूसरी कंपनी में भी उसी पद पर रखा गया।
शिकायत के अनुसार, हाल ही में ठेका व्यवस्था में बदलाव के बाद नई कंपनी और टाइगर सिक्योरिटी सर्विस द्वारा कर्मचारियों से दस्तावेज जमा कराने के नाम पर कथित अनियमितताएं की गईं। श्रमिकों का आरोप है कि नियुक्ति पत्र तक उपलब्ध नहीं कराया गया और कर्मचारियों को दबाव में रखकर मनमाने तरीके से काम कराया जा रहा है।

स्किल्ड वर्कर से कराई जा रही मजदूरी!

सबसे गंभीर आरोप यह है कि वर्षों से तकनीकी पद पर काम कर रहे श्रमिकों को अचानक उनके मूल कार्य से हटाकर सामान्य मजदूरी और सफाई जैसे कार्यों में लगाया जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि यदि वे इसका विरोध करते हैं तो नौकरी से निकालने की धमकी दी जाती है। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि लगभग 23 कर्मचारियों को इसी तरह दबाव बनाकर कार्य बदलने के लिए मजबूर किया गया। श्रमिकों का आरोप है कि यह केवल श्रम शोषण नहीं बल्कि उनके सम्मान और अधिकारों पर सीधा हमला है।

समय पर वेतन नहीं, बेसिक सैलरी में कटौती का आरोप

पीड़ित कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया है कि टाइगर सिक्योरिटी सर्विस द्वारा समय पर वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा। इसके साथ ही कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भी कटौती की जा रही है, जिससे भविष्य निधि (पीएफ) और अन्य श्रमिक हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मजदूरों का कहना है कि जब वेतन और श्रम अधिकारों की बात उठाई जाती है तो उन्हें प्रबंधन की ओर से दबाव का सामना करना पड़ता है। यही कारण है कि मामला अब श्रम विभाग तक पहुंच चुका है।

यूनियन और ठेका प्रक्रिया पर भी सवाल

शिकायत में कुछ यूनियन पदाधिकारियों और ठेका प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि जिन लोगों का काम श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है, वे ही कथित रूप से ठेका व्यवस्था में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। इससे निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन शिकायत में की गई मांगों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक कंपनी या एक ठेका एजेंसी का मामला नहीं रहेगा, बल्कि प्रदेश में औद्योगिक श्रमिकों के अधिकारों पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा।

श्रम विभाग की चुप्पी पर उठ रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब श्रमिकों ने विधिवत आवेदन देकर अपनी पीड़ा श्रम आयुक्त कार्यालय तक पहुंचा दी है, तब अब तक जांच और कार्रवाई क्यों नहीं हुई? आखिर मजदूरों को न्याय के लिए कितने दिनों तक इंतजार करना पड़ेगा? प्रदेश के विभिन्न श्रमिक संगठनों का कहना है कि यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आने वाले समय में यह मामला बड़ा आंदोलन बन सकता है।

साय सरकार से न्याय की उम्मीद

छत्तीसगढ़ की सत्ता में बैठी विष्णुदेव साय सरकार लगातार स्थानीय युवाओं और मजदूरों के हितों की बात करती रही है। ऐसे में अब पीड़ित श्रमिकों की निगाहें सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और श्रम विभाग पर टिक गई हैं।
मजदूरों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की जमीन, पानी और संसाधनों का उपयोग कर उद्योगपति मुनाफा कमा रहे हैं, लेकिन उसी छत्तीसगढ़ के मजदूरों को उनका हक नहीं मिल रहा। वर्षों तक सेवा देने वाले श्रमिक आज अपने रोजगार, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई लड़ने को मजबूर हैं।

इन सवालों का जवाब अब सरकार और जिम्मेदार विभागों को देना होगा। फिलहाल, केएसके ( JSW)पावर प्लांट नरियरा से उठी यह आवाज प्रदेश की औद्योगिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न बनकर उभर रही है और हजारों मजदूरों की निगाहें अब कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। न्याय मिलेगा या फिर छत्तीसगढ़िया मजदूर एक बार फिर ठगा जाएगा, यह आने वाला समय बताएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed