सुशासन तिहार में अभद्रता पड़ी भारी: दुर्ग जनपद पंचायत सीईओ रूपेश कुमार पांडेय निलंबित,मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सख्त रुख के बाद बड़ी कार्रवाई
दुर्ग – छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक अनुशासन को लेकर एक बड़ा और कड़ा संदेश देते हुए जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) रूपेश कुमार पांडेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान भाजपा मंडल महामंत्री के साथ हुए विवाद और कथित अभद्र व्यवहार के मामले में यह कार्रवाई की गई है। दुर्ग संभागायुक्त द्वारा जारी निलंबन आदेश के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि 29 मई को आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान सीईओ रूपेश पांडेय और एक भाजपा मंडल महामंत्री के बीच तीखी बहस हो गई थी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के सामने दोनों पक्षों के बीच हुई नोकझोंक का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की ओर से अधिकारी के व्यवहार को लेकर गंभीर शिकायतें शासन-प्रशासन तक पहुंची थीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर ने 30 मई को सीईओ रूपेश पांडेय को कारण बताओ नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। सूत्रों के अनुसार अधिकारी द्वारा प्रस्तुत जवाब का परीक्षण किया गया, लेकिन प्रशासन उसे संतोषजनक नहीं मान सका। इसके बाद कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही, अनुशासनहीनता और अशिष्ट आचरण को आधार बनाकर संभागायुक्त दुर्ग ने उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सुशासन तिहार जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का उद्देश्य जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान और शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ाना है। ऐसे कार्यक्रम में किसी अधिकारी द्वारा जनप्रतिनिधियों अथवा आम नागरिकों के साथ असंयमित व्यवहार को शासन की मंशा के विपरीत माना गया। यही कारण है कि मामले में त्वरित और कड़ी कार्रवाई की गई।
राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। माना जा रहा है कि सरकार ने इस फैसले के जरिए स्पष्ट संकेत दिया है कि जनता और जनप्रतिनिधियों के सम्मान से समझौता करने वाले अधिकारियों को किसी भी स्थिति में बख्शा नहीं जाएगा।
सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वयं इस मामले का संज्ञान लिया था। मुख्यमंत्री तक वायरल वीडियो और शिकायतों की जानकारी पहुंचने के बाद पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब की गई। जांच और तथ्यों के परीक्षण के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हुई और अंततः निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।

मुख्यमंत्री का स्पष्ट संदेश है कि शासन की प्राथमिकता जनता है और जनता के सम्मान के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा है कि “जनता जनार्दन सर्वोपरि है। जनता के सम्मान और अधिकारों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी अधिकारी को बख्शा नहीं जाएगा।”
इस कार्रवाई को सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति का हिस्सा माना जा रहा है। सुशासन तिहार के माध्यम से जहां सरकार प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर जनता और जनप्रतिनिधियों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम भी उठाए जा रहे हैं।
रूपेश कुमार पांडेय के निलंबन के बाद पूरे प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारियों के बीच यह संदेश स्पष्ट रूप से पहुंचा है कि सरकारी दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही, अनुशासनहीनता और अभद्र व्यवहार किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं होगा। आने वाले दिनों में यह मामला प्रदेश की राजनीति और प्रशासन दोनों में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

