ब्रेकिंग न्यूज़ : कांकेर में पुलिस-नक्सली मुठभेड़, महिला माओवादी कमांडर रूपी ढेर
छत्तीसगढ़ – नक्सल प्रभावित कांकेर जिले में सोमवार को सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक महिला माओवादी कमांडर के मारे जाने की खबर सामने आई है। यह मुठभेड़ छोटेबेठिया–परतापुर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती जंगलों में हुई, जहां पिछले कुछ समय से माओवादियों की सक्रियता की सूचना मिल रही थी।
पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के अनुसार, माचपल्ली–आरामझोरा–हिडूर क्षेत्र के घने जंगलों में माओवादियों की मौजूदगी की पुख्ता आसूचना मिलने के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया। इसी दौरान माचपल्ली इलाके में जवानों और माओवादियों के बीच आमना-सामना हो गया, जो जल्द ही मुठभेड़ में बदल गया।
मुठभेड़ के बाद जब क्षेत्र में सर्चिंग की गई, तो सुरक्षा बलों को एक महिला माओवादी का शव बरामद हुआ। बाद में उसकी पहचान एसीएम (एरिया कमेटी मेंबर) स्तर की महिला माओवादी कमांडर रूपी के रूप में की गई। पुलिस के अनुसार, रूपी लंबे समय से बस्तर संभाग में सक्रिय थी और संगठन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका थी।
पुलिस ने यह भी जानकारी दी कि मारी गई माओवादी कमांडर रूपी, डीकेएसजेडसी (दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी) के सदस्य विजय रेड्डी की पत्नी थी। विजय रेड्डी का भी वर्ष 2025 में मानपुर-मोहला क्षेत्र में एक मुठभेड़ के बाद शव बरामद किया गया था। इस प्रकार, यह घटना माओवादी संगठन के लिए एक और बड़ा झटका मानी जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, रूपी बस्तर क्षेत्र में सक्रिय अंतिम तेलुगू माओवादी कैडर मानी जा रही थी। उसकी मौत के बाद क्षेत्र में तेलुगू माओवादी नेटवर्क को बड़ा नुकसान पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल अभियान में एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देख रही हैं।
मुठभेड़ स्थल की तलाशी के दौरान जवानों ने मृत माओवादी के पास से एक पिस्टल, भारी मात्रा में गोला-बारूद और अन्य दैनिक उपयोग की सामग्री भी बरामद की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि माओवादी इलाके में सक्रिय रूप से अपनी उपस्थिति बनाए हुए थे और किसी बड़ी साजिश की तैयारी में हो सकते थे।
घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा आसपास के जंगलों में सघन सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि अन्य छिपे हुए माओवादियों का पता लगाया जा सके और किसी भी संभावित खतरे को समय रहते निष्क्रिय किया जा सके।
इस बीच, बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी. ने इस मुठभेड़ को सुरक्षा बलों की बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा माओवादी कैडरों को लगातार आत्मसमर्पण और पुनर्वास का अवसर दिया जा रहा है। बीते कुछ महीनों में बड़ी संख्या में माओवादियों ने इस पहल का लाभ उठाते हुए मुख्यधारा में वापसी की है।
आईजीपी ने कहा कि बावजूद इसके, कुछ माओवादी कैडर अब भी हिंसा का रास्ता छोड़ने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने रूपी के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि हिंसा के मार्ग पर चलने का परिणाम अंततः विनाश ही होता है। उन्होंने शेष बचे माओवादी कैडरों से अपील की कि वे जल्द से जल्द आत्मसमर्पण कर शांतिपूर्ण और सम्मानजनक जीवन की ओर लौटें।

