March 12, 2026

बिना मान्यता के स्कूल चलाना कोर्ट की अवमानना – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त, कृष्णा पब्लिक स्कूल को नोटिस

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रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिना मान्यता के स्कूल संचालन और एडमिशन के विज्ञापन पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने Krishna Public School को मामले में पार्टी बनाते हुए नोटिस जारी किया है और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को व्यक्तिगत शपथपत्र (पर्सनल एफिडेविट) दाखिल करने का आदेश दिया है।

मामला WPPIL No. 22/2016 से जुड़ा है, जिसमें इंटरवीनर विकास तिवारी द्वारा उठाई गई शिकायतों पर अदालत ने तत्काल संज्ञान लिया और सख्त निर्देश जारी किए।

शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट नाराज

विकास तिवारी ने अदालत को बताया कि डायरेक्टर डीपीआई छत्तीसगढ़ ने 5 फरवरी 2026 को उनकी शिकायतों को दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर के जिला शिक्षा अधिकारियों को भेजते हुए एक सप्ताह में कार्रवाई का आदेश दिया था। लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
इस पर कोर्ट ने डिप्टी डायरेक्टर, पब्लिक इंस्ट्रक्शंस को निर्देश दिया कि संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी अपने आदेश का तत्काल पालन करें और अगली सुनवाई तक कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।
अवैध एडमिशन विज्ञापन पर सख्त टिप्पणी

इंटरवीनर ने IA No. 14/2026 के माध्यम से 7 मार्च 2026 को प्रकाशित एक विज्ञापन कोर्ट के समक्ष रखा, जिसमें Krishna Public School द्वारा सत्र 2026-27 के लिए छह स्थानों पर एडमिशन खोलने का प्रचार किया गया है।

बताया गया कि तुलसी कृष्णा किड्स एकेडमी, मोवा, शंकर नगर, न्यू राजेंद्र नगर, सुंदर नगर और शैलेंद्र नगर में संचालित स्कूलों को आवश्यक मान्यता नहीं है, इसके बावजूद नए एडमिशन का विज्ञापन दिया जा रहा है। कोर्ट ने इसे अपने पूर्व आदेशों (05 अगस्त 2025, 13 अगस्त 2025 और 17 सितंबर 2025) का उल्लंघन मानते हुए कहा कि बिना मान्यता स्कूलों द्वारा एडमिशन का विज्ञापन देना कोर्ट के वैध अधिकार की अवमानना है।

कोर्ट के निर्देश

Krishna Public School को Respondent No. 51 बनाया गया
IA No. 14/2026 पर नोटिस जारी,राज्य के अधिवक्ता को नोटिस सर्व कराने का निर्देश, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पर्सनल एफिडेविट दाखिल करने का आदेश

इंटरवीनर विकास तिवारी ने कहा कि हाईकोर्ट ने आमजन की शिकायतों और शिक्षा के अधिकार कानून के उल्लंघन पर गंभीरता से संज्ञान लिया है, जो गरीब बच्चों के अधिकारों की बड़ी जीत है।

मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च 2026 को होगी।

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