March 6, 2026

छत्तीसगढ़ ब्यूरोक्रेसी ख़बर : कुर्सी किसी की, रिमोट किसी और के हाथ?चीफ सेक्रेटरी नाम के, पावर सेंटर कोई और!

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रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता

रायपुर – छत्तीसगढ़ की सत्ता और प्रशासन इन दिनों गंभीर सवालों के घेरे में है। सरकार चल रही है, फैसले हो रहे हैं, आदेश निकल रहे हैं—लेकिन सिस्टम के भीतर एक ही चर्चा सबसे तेज़ है कि आख़िर असली कंट्रोल किसके पास है?

काग़ज़ों में प्रदेश का प्रशासनिक मुखिया चीफ सेक्रेटरी विकास शील होता है, लेकिन मंत्रालय और जिलों के अफसरों के बीच चर्चा कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

सत्ता के गलियारों में गूंजता एक नाम— सुबोध सिंह

राज्य के वरिष्ठ अफसरों की दबी ज़ुबान में एक वाक्य आम हो चुका है—
“सुबोध जी की सहमति के बिना प्रदेश में पत्ता भी नहीं हिलता।” यानी कुर्सी कहीं और, रिमोट कंट्रोल किसी और के हाथ!

सूत्रों का दावा है कि कई अहम प्रशासनिक फैसलों में फाइलें पहले “वहां” जाती हैं, फिर औपचारिक रूप से सिस्टम में आगे बढ़ती हैं।

NTA, नीट विवाद और फिर सत्ता में दमदार वापसी

सुबोध सिंह वही अधिकारी हैं जिनका नाम कभी राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) से जुड़ा रहा। नीट पेपर लीक विवाद के बाद देशभर में बवाल मचा, युवाओं में आक्रोश फूटा और उस दौर में साहब को डायरेक्टर पद से हटना पड़ा। लेकिन ब्यूरोक्रेसी में कहा जाता है— “यहां विदाई अंत नहीं, नई एंट्री की शुरुआत होती है।”

कुछ ही समय बाद सत्ता के गलियारों में सुबोध सिंह की ज़ोरदार वापसी हुई और वे सीधे मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव जैसे ताकतवर पद पर काबिज़ हो गए।

बजट मंच की तस्वीर जिसने मचा दी खलबली

छत्तीसगढ़ विधानसभा में बजट पेश किया जा रहा था। मंच पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। लेकिन कैमरों ने जो तस्वीर कैद की, उसने चर्चाओं को आग दे दी— मुख्यमंत्री के ठीक बगल वाली कुर्सी पर सुबोध सिंह बैठे दिखे , जबकि चीफ सेक्रेटरी मंच से नदारद नज़र आए। इसके बाद सवाल उठने लगे— क्या चीफ सेक्रेटरी सिर्फ औपचारिक पद तक सीमित रह गए हैं? क्या प्रदेश का असली पावर सेंटर शिफ्ट हो चुका है?

दिन सरकार का, रात समीक्षा की!

सूत्र बताते हैं कि सुबोध सिंह हर रात सभी विभागों से रिपोर्ट लेते हैं ।फाइलों की मॉनिटरिंग, अफसरों की परफॉर्मेंस और योजनाओं की प्रगति—सब पर सीधी नज़र। यानी दिन में सरकार,रात में कंट्रोल रूम…

इसी वजह से उन्हें सिर्फ “मुख्यमंत्री सचिवालय” नहीं, बल्कि पूरे राज्य का सुपरविजन मिलने की बात कही जा रही है। सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम.. छत्तीसगढ़ में सत्ता की कुर्सी किसके पास है?.. और फैसलों का रिमोट कंट्रोल कौन चला रहा है?

सच क्या है—यह तो सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग ही जानते होंगे,
लेकिन इतना तय है कि इस साइलेंट पावर गेम ने पूरी ब्यूरोक्रेसी को अलर्ट मोड में ला दिया है।

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