एक्सक्लूसिव; अरण्य भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम फेल,सुरक्षा के नाम पर बड़ा खेल,एक्सपायर्ड सिलेंडर बना ‘टाइम बम’ – पढ़े पूरी ख़बर
रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता
छत्तीसगढ़ – नया रायपुर (अटल नगर) सहित रायपुर के कई सरकारी दफ्तरों में फायर सेफ्टी सिस्टम की सच्चाई बेहद चिंताजनक है। जिन इंतज़ामों पर सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और आम लोगों की सुरक्षा टिकी है, वे ज़मीन पर सिर्फ दिखावा साबित हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि अगर किसी भी सरकारी दफ्तर में आग लग जाए, तो जान–माल की सुरक्षा भगवान भरोसे होगी और अफरा-तफरी तय मानी जा रही है।
अरण्य भवन में सुरक्षा की पोल
अरण्य भवन में लगा फायर सेफ्टी सिस्टम खुद खतरा बनता नजर आ रहा है। यहां लगाया गया फायर सिलेंडर न तो समय पर जांचा गया, न ही कभी रिफिल कराया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि यह सिलेंडर PCCF व्ही. श्रीनिवास राव के कक्ष से महज़ तीन कमरों की दूरी पर लगा है, फिर भी वर्षों से इसकी अनदेखी की जा रही है।
सिलेंडर की हकीकत:
मैन्युफैक्चरिंग डेट: 2016
क्षमता: 6 किलो
उद्देश्य: आपात स्थिति में आग को फैलने से रोकना
वास्तविक स्थिति: न जांच, न रिफिल — पूरी तरह निष्क्रिय
यानि जिस उपकरण को संकट के वक्त जीवनरक्षक बनना था, वह आज खुद सिस्टम की लापरवाही का सबूत बन गया है।

एक चिंगारी और बड़ा हादसा!
विशेषज्ञों के मुताबिक, फायर सिलेंडर की समय-समय पर जांच और रिफिल अनिवार्य होती है। लेकिन सरकारी दफ्तरों में यह नियम फाइलों तक सीमित रह गया है। अगर ऐसे में आग लगती है, तो न सिर्फ दफ्तर और दस्तावेज जलेंगे, बल्कि कर्मचारियों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
पहले भी जल चुके हैं अहम दस्तावेज
यह कोई पहली चेतावनी नहीं है। बीते कुछ महीनों में रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय रायपुर और आबकारी कार्यालय रायपुर, गुढ़ियारी बिजली आफिस, रायगढ़ के मत्स्य विभाग में आग लगने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन हादसों में कई महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज पूरी तरह जलकर राख हो गए। बावजूद इसके, अब तक न कोई ठोस कार्रवाई दिखी और न ही फायर सेफ्टी सिस्टम को दुरुस्त करने की गंभीर पहल।
जांच जारी, सुधार नदारद
आग की घटनाओं के बाद जांच जरूर बैठी, लेकिन सवाल यह है कि जब तक जांच पूरी होगी, तब तक अगला दफ्तर सुरक्षित कैसे रहेगा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है?
सिस्टम पर बड़े सवाल
क्या सरकारी दफ्तरों में कर्मचारियों की जान की कीमत शून्य है?
क्या फायर सेफ्टी सिर्फ निरीक्षण रिपोर्ट और फोटो तक सीमित है?
क्या हादसे के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी?
अगर समय रहते फायर सेफ्टी सिस्टम की तत्काल जांच, रिफिल और ऑडिट नहीं कराया गया, तो अगली आग सिर्फ कागज़ नहीं जलाएगी, बल्कि सरकार और प्रशासन की लापरवाही को भी बेनकाब कर देगी।

