March 6, 2026

नारायणपुर में खनन परिवहन पर महाबवाल — चक्काजाम से ठप हुआ जिला, बीएसपी पर वादाखिलाफी का आरोप

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रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता

नारायणपुर – जिले में सोमवार को खनन परिवहन पर लगाए गए प्रतिबंध और बढ़ती लागत के विरोध में भारी आक्रोश देखने को मिला। ट्रक यूनियन, स्थानीय जनप्रतिनिधि और खनन परिवहन से जुड़े सैकड़ों लोगों ने सड़कों पर उतरकर नारायणपुर–अंतागढ़ मुख्य मार्ग पर जोरदार चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के चलते घंटों तक यातायात पूरी तरह ठप रहा, यात्री बसें और अन्य वाहन जाम में फंसे रहे।

प्रदर्शनकारियों ने सीधे तौर पर भिलाई स्टील प्लांट (बीएसपी) पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि खनन तो लगातार जारी है, लेकिन परिवहन व्यवस्था को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं निकाला जा रहा।

50 किमी का सफर 250 किमी में बदलने का आरोप

नारायणपुर जिले के खोड़गांव–अंजरेल क्षेत्र में बीएसपी की लौह अयस्क खदान संचालित है। यहां से निकला लौह अयस्क ट्रकों के जरिए नारायणपुर से अंतागढ़ तक करीब 50 किलोमीटर ले जाया जाता था।
ट्रक मालिकों का कहना है कि मार्ग सिंगल लेन होने का हवाला देकर प्रशासन ने माइंस से जुड़े भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। इसके बाद ट्रकों को कोंडागांव होकर लंबा चक्कर लगाने को मजबूर किया जा रहा है, जिससे दूरी बढ़कर लगभग 250 किलोमीटर हो गई है।

डीजल-समय-श्रम लागत कई गुना बढ़ी

ट्रक संचालकों के अनुसार लंबा रूट अपनाने से डीजल खर्च, समय और श्रम लागत कई गुना बढ़ गई है। परिवहन व्यवसाय आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है, लेकिन न तो बीएसपी और न ही प्रशासन कोई ठोस पहल कर रहा है।

दिन में रोक, रात में मजबूरी — सुरक्षा पर खतरा

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि नारायणपुर शहर से दिन में ट्रकों की आवाजाही पर रोक है और केवल रात में ही अनुमति दी गई है। इससे ड्राइवरों को दिनभर इंतजार करना पड़ता है और रात में लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे दुर्घटना और सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है।

NH-130D बना मुसीबत

नारायणपुर से कोंडागांव तक NH 130D का निर्माण कार्य अभी अधूरा है। उड़ती धूल, खराब सड़क और सीमित दृश्यता के कारण आए दिन जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बन रही है। चालकों का कहना है कि धूल के गुबार में सड़क तक दिखाई नहीं देती।

हर दिन 850 ट्रकों का दबाव

सूत्रों के मुताबिक बीएसपी माइंस से जुड़े करीब 250 ट्रक और निको कंपनी से जुड़े लगभग 600 ट्रक प्रतिदिन इसी मार्ग से गुजरते हैं। भारी वाहनों के इस दबाव ने यातायात व्यवस्था को पूरी तरह चरमरा दिया है।

प्रशासन पर दबाव, समाधान की मांग

चक्काजाम के बाद इलाके में खनन परिवहन, विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द हस्तक्षेप कर कोई स्थायी समाधान निकालेगा, ताकि आवागमन और आर्थिक गतिविधियां फिर से पटरी पर लौट सकें।

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