नक्सलवाद पर सत्ता की दो टाइमलाइन! मोदी–शाह की 31 मार्च डेडलाइन को CM साय ने 31 दिसंबर कर दिया—भटकी सरकार या फिसली ज़ुबान?
छत्तीसगढ़ – देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे को लेकर स्पष्ट, कठोर और ऐतिहासिक संकल्प लिया है।देश और छत्तीसगढ़ को बार-बार भरोसा दिलाया गया कि 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद का अंत होगा। यह कोई हवा-हवाई घोषणा नहीं थी। पिछले दो सालों में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह करीब 10 बार छत्तीसगढ़ आए, हर बार हाईलेवल सुरक्षा बैठकें, फोर्सेस की समीक्षा और दो टूक ऐलान— 31 मार्च 2026: नक्सली सफाया तय।
यह डेडलाइन अब सिर्फ फाइलों में नहीं, बल्कि आम जनता के ज़हन में दर्ज है। बस्तर से सरगुजा और रायपुर तक, बुज़ुर्गों से लेकर बच्चों तक को यह तारीख़ याद है। लेकिन अब मुख्यमंत्री ने पूरा खेल बिगाड़ दिया!
मुख्यमंत्री के एक बयान ने पूरा नैरेटिव हिला
मीडिया के सामने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने ऐसा बयान दे दिया, जिसने केंद्र की रणनीति पर ही सवाल खड़े कर दिए। मुख्यमंत्री बोले— 31 दिसंबर 2026 तक नक्सलवाद खत्म होगा। बस फिर क्या था—
यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया और प्रदेश ही नहीं, देश भर में भारी कन्फ्यूजन पैदा हो गया।
सवाल बेहद गंभीर हैं—
क्या मुख्यमंत्री को अमित शाह की घोषित डेडलाइन की जानकारी नहीं?
क्या राज्य सरकार केंद्र की रणनीति से अलग चल रही है? या फिर नक्सलवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर लापरवाही से बयान दे दिया गया?
अगर यह जुबान फिसलने का मामला है, तो उसका खामियाजा सुरक्षा बलों के मनोबल, ऑपरेशन की गंभीरता, और जनता के भरोसे को भुगतना पड़ता है।…और अगर यह जानबूझकर बदली गई डेडलाइन है, तो फिर सवाल और भी खतरनाक है.

