मंत्री जी ने थामा माइक, गूंजा ‘दरिया’! राजस्व–उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा का छत्तीसगढ़ी अवतार, संस्कृति विभाग आखिर क्यों बना मूक दर्शक?
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) बलौदाबाजार – छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक अनोखी लेकिन सनसनीखेज़ तस्वीर सामने आई है। राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा अब भाषण नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ी लोकगीत ‘दरिया’ गाकर मंच लूट रहे हैं। रामायण पाठ से पहचान बनाने वाले मंत्री जी का यह नया अवतार लोगों को चौंका भी रहा है और सवाल भी खड़े कर रहा है।
कार्यक्रम के दौरान जैसे ही मंत्री वर्मा ने माइक थामा, पूरा माहौल बदल गया। सुर, ताल और भाव—तीनों में ऐसा सामंजस्य कि श्रोता मंत्रमुग्ध रह गए। तालियों की गड़गड़ाहट साफ बता रही थी कि मंत्री जी केवल नेता नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति के सच्चे साधक हैं।
लेकिन यहीं से शुरू होती है असली बहस…
❓ क्या छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को बचाने की जिम्मेदारी सिर्फ मंचों पर गाने वाले मंत्री पर छोड़ दी गई है?
❓ संस्कृति विभाग आखिर किस इंतज़ार में है?
राजनीति की भागदौड़ के बीच यदि कोई मंत्री खुद लोकगीतों को जीवित रखने के लिए सामने आता है, तो यह महज़ शौक नहीं बल्कि संस्कृति के लिए बड़ा संदेश है। बावजूद इसके, अब तक संस्कृति विभाग की ओर से न कोई पहल, न कोई मंच, न कोई सम्मान—सवाल उठना लाज़िमी है।

लोक कलाकारों में इस बात को लेकर खासा रोष है। उनका साफ कहना है कि अगर मंत्री टंकराम वर्मा को विधिवत मंच दिया जाए, तो वे पूरी रात छत्तीसगढ़ी गीतों से समां बांध सकते हैं।
अब बड़ा सवाल यह है—
🎤 क्या मंत्री जी के सुरों को सरकार का मंच मिलेगा?
या फिर छत्तीसगढ़ की यह उभरती सांस्कृतिक सनसनी भी फाइलों में दबकर रह जाएगी?
प्रदेश की निगाहें टिकी हैं…
अब अगली चाल संस्कृति विभाग की होगी।

