छत्तीसगढ़ पुलिस में पदोन्नति विस्फोट! IPS अधिकारी ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, सिस्टम पर लगाए संगीन आरोप
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता )रायपुर – छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग में पदोन्नति की प्रक्रिया अब संदेह के घेरे में आ चुकी है। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 2012 बैच के वरिष्ठ अधिकारी धर्मेंद्र सिंह छवई ने सीधे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर पुलिस मुख्यालय पर जानबूझकर भेदभाव, अन्याय और संवैधानिक अधिकारों के हनन जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
यह पत्र सामने आने के बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई है और शासन के गलियारों में एक ही सवाल गूंज रहा है— क्या छत्तीसगढ़ पुलिस में पदोन्नति योग्यता से नहीं, पसंद-नापसंद से तय हो रही है?

चार बार विचार, चार बार नजरअंदाज
IPS अधिकारी धर्मेंद्र सिंह छवई, जो वर्तमान में कवर्धा जिले के पुलिस अधीक्षक हैं, ने अपने पत्र में चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके मुताबिक वे नियमों के अनुसार पूरी तरह पात्र होने के बावजूद लगातार पदोन्नति से वंचित किए गए। उन्होंने बताया कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी चार पदोन्नति सूचियों—
📅 10 अक्टूबर 2024
📅 31 दिसंबर 2024
📅 26 मई 2025
📅 31 जुलाई 2025

इन सभी सूचियों में उनके नाम पर विचार तो हुआ, लेकिन हर बार उन्हें बिना ठोस कारण बताए बाहर कर दिया गया।
संवैधानिक अधिकारों पर चोट?
पत्र में अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि यह पूरा मामला समान अवसर के अधिकार,प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत और प्रशासनिक पारदर्शिता
तीनों के खिलाफ जाता है। सवाल यह है कि यदि एक IPS अधिकारी के साथ ऐसा हो सकता है, तो नीचे के अधिकारियों का क्या हाल होगा?
पुलिस मुख्यालय की भूमिका पर सवाल
मुख्यमंत्री को सीधे पत्र लिखे जाने से यह स्पष्ट हो गया है कि मामला अंदरखाने दबाने लायक नहीं रहा। जानकारों का कहना है कि यह केवल एक अधिकारी की पदोन्नति का मामला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की साख का प्रश्न बन चुका है।
अब मुख्यमंत्री की अग्निपरीक्षा
अब सबकी निगाहें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पर टिकी हैं— क्या होगी निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच?…क्या पदोन्नति प्रक्रिया की फाइलें खुलेंगी?
या फिर यह मामला भी सिस्टम की फाइलों में दफन हो जाएगा?
एक बात तय है— छत्तीसगढ़ पुलिस में पदोन्नति को लेकर उठा यह सवाल अब शांत नहीं बैठने वाला।

