कांग्रेस का कथित कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल लापता!जमीन खा गई? आसमान निगल गया? या फिर देश छोड़कर फरार?
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता )रायपुर – छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों एक नाम बारूद बन चुका है — राम गोपाल अग्रवाल। कभी सत्ता के गलियारों का सबसे ताक़तवर चेहरा, और आज जांच शुरू होते ही रहस्यमय तरीके से गायब।
राज्य पूछ रहा है—
👉 आखिर राम गोपाल अग्रवाल है कहाँ?
🔥 सत्ता में ‘सुपर पावर’, सत्ता गई तो ‘सुपर गायब’
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस शासनकाल में राम गोपाल अग्रवाल को
पार्टी का कथित कोषाध्यक्ष शराब कारोबार से जुड़े कथित सिंडिकेट का सूत्रधार…नान घोटाले के आर्थिक प्रबंधन का दिमाग माना जाता रहा है। कहा जाता है कि करोड़ों की कथित अवैध कमाई का रास्ता उसी के इशारे पर खुलता और बंद होता था। लेकिन जैसे ही सत्ता बदली…जैसे ही जांच एजेंसियों ने रफ्तार पकड़ी…राम गोपाल अग्रवाल हवा हो गया।
🍾 शराब घोटाला: बोतल-बोतल से निकला करोड़ों का खेल
आरोप है कि कांग्रेस शासन में सरकारी शराब नीति के समानांतर
एक अवैध सिंडिकेट सिस्टम खड़ा किया गया..हर बोतल से कथित अवैध वसूली हुई और इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टर माइंड राम गोपाल अग्रवाल था। जांच फाइलों में उसका नाम बार-बार उछलता है — लेकिन वह खुद कहीं नज़र नहीं आता।
कौन हैं रामगोपाल अग्रवाल?
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के साथ तस्वीरों में दिखने वाला यह शख्स कोई साधारण नेता नहीं, बल्कि लगभग एक दशक तक छत्तीसगढ़ कांग्रेस का कोषाध्यक्ष रहा है। भूपेश बघेल के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए भी रामगोपाल अग्रवाल कोषाध्यक्ष थे..वर्ष 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी, भूपेश बघेल मुख्यमंत्री बने सत्ता में आते ही रामगोपाल अग्रवाल का राजनीतिक और प्रशासनिक कद अचानक बढ़ गया।

नान (नागरिक आपूर्ति निगम) का अध्यक्ष और बड़ा फैसला
कांग्रेस सरकार बनने के बाद, कोषाध्यक्ष रहते हुए ही रामगोपाल अग्रवाल को नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) का अध्यक्ष बनाया गया।
इन्हीं के कार्यकाल में राइस मिलरों को फायदा पहुँचाने के लिए
कस्टम मिलिंग की प्रोत्साहन राशि 40 रुपये से बढ़ाकर 120 रुपये कर दी गई। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की जांच में यह सामने आया कि इस प्रोत्साहन राशि के बदले कमीशन लिया गया।
शराब घोटाला और कोषाध्यक्ष की भूमिका ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि शराब घोटाले से जुड़ा पैसा…कांग्रेस के कोषाध्यक्ष होने के नाते रामगोपाल अग्रवाल तक पहुँचा…यानी एक तरफ नान घोटाला, दूसरी तरफ शराब घोटाला—दोनों मामलों में एक ही नाम केंद्र में रहा।
ईडी की गिरफ्तारी से बचने के लिए तीन साल से अंडरग्राउंड!
सूत्रों के मुताबिक, ईडी की संभावित गिरफ्तारी से बचने के लिए रामगोपाल अग्रवाल पिछले तीन वर्षों से गायब हैं।
न कोई सार्वजनिक कार्यक्रम
न कोई बयान
न जांच एजेंसियों के सामने पेशी
और सबसे हैरानी की बात—
प्रदेश कांग्रेस आज भी बिना कोषाध्यक्ष के काम कर रही है।

रामगोपाल पकड़े गए तो कई चेहरे बेनकाब होंगे?
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जब भी रामगोपाल अग्रवाल जांच एजेंसियों के हत्थे चढ़ेंगे, तो क्या सिर्फ उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी
या फिर कांग्रेस के कई बड़े नेताओं के नाम भी सामने आएंगे?

