एनएचए द्वारा आयुष्मान योजना की दरों में वृद्धि के लिए 2022 में की गयी अनुशंसा को लागू करे सरकार: डॉ. राकेश गुप्ता
एसोसिएशन ऑफ़ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) छत्तीसगढ़ चैप्टर ने स्वास्थ्य सचिव से की मांग
डीजीआरसी और एसजीआरसी की कार्यप्रणाली सुधारने की भी मांग की
राष्ट्रीय स्वास्थ प्राधिकरण की मुख्य कार्य पालन अधिकारी को भी विषय से कराया अवगत
रायपुर – एसोसिएशन ऑफ़ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया को दो अलग अलग पत्र लिख आयुष्मान योजना के पैकेज दरों में बढ़ोतरी और इस योजना में आ रही अन्य दिक्कतों के समाधान के लिए तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। पत्रों की प्रतिलिपि डॉ. गुप्ता ने नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) भारत सरकार की मुख्य कार्यपालन अधिकारी वी. हेकाली ज़हिमोमि, छत्तीसगढ़ की कमिश्नर एवं डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज व् आयुष्मान योजना की मुख्य कार्य पालन अधिकारी डॉ. प्रियंका शुक्ल को भी भेजी है। डॉ. गुप्ता ने एएचपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. एम.आई. शाहदुल्ला एवं डायरेक्टर जनरल डॉ. गिरधर ज्ञानी को भी विषय से अवगत करवाया है।
पत्र में डॉ. गुप्ता ने लिखा है कि स्वास्थ्य सचिव को 20 अगस्त 2025 को आयुष्मान योजना के पैकेज दरों में संशोधन एवं लंबित भुगतान के विषय के अतिरिक्त कुछ अन्य विषय स्वास्थ्य सचिव के संज्ञान में लाना चाहते हैं।
डॉ. गुप्ता ने पत्र में बताया है कि 2022 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण से इस योजना के अंतर्गत कई प्रक्रियाओं की पैकेज दरों में वृद्धि करने की अनुशंसा की गई थी लेकिन पैकेज दरों की अधिकांश अनुशंसाओं को आज तक लागू नहीं किया गया है। इस वजह से अस्पतालों को 2018 में तय दरों के तहत काम करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यह ध्यान देने योग्य है कि चिकित्सा मुद्रास्फीति प्रति वर्ष लगभग 12% – 14% रहने की उम्मीद है।
डॉ. गुप्ता ने यह भी बताया है कि जिला शिकायत निवारण समिति (डीजीआरसी) और राज्य शिकायत निवारण समिति (एसजीआरसी) के समक्ष 2023 से लंबित मामलों का निपटारा 31 मार्च 2025 तक भारत सरकार को दावों के क्लोज़र हेतु लेखा परीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करने से पहले नहीं किया गया है।डीजीआरसीऔर एसजीआरसीकी बैठकें भी प्रति माह नहीं होती हैं। महासमुंद जिले की अंतिम DGRC बैठक फरवरी 2024 में हुई थी। दुर्ग और राजनांदगांव जिलों में बैठक एक वर्ष से अधिक समय से नहीं हुई हैं। अन्य जिलों में भी कमोबेश यही स्थिति है।डॉ. गुप्ता ने आगे बताया है कि बिना किसी औचित्य के बाद के दावों में पहले से भुगतान की गई दावा राशि की वसूली के कई प्रकरण सामने आए हैं। कई आपातकालीन और जीवन रक्षक मामलों को “किसी भी कारण से” श्रेणी के अंतर्गत खारिज कर दिया गया है, जिससे मरीजों और अस्पताल को परेशानी हो रही है। डीजीआरसी और एसजीआरसी की बैठकों के बाद रद्द किए गए मामलों के पुनर्जीवित किए जाने की अनुशंसा का भी अभी तक निपटारा नहीं हुआ है।
उपरोक्त समस्याओं के समाधान के लिए डॉ. गुप्ता ने स्वास्थ्य सचिव से अनुरोध किया है कि आयुष्मान योजना के पैकेज दरों में वृद्धि के लिए 2022 में दी गई NHA की अनुशंसाओं के साथ वृद्धि में 2022 से 2025 (तीन वर्ष) तक की अतिरिक्त मुद्रास्फीति को भी शामिल करके नई दरों को अंतिम रूप देकर लागू किया जाना चाहिए।साथ ही साथ डीजीआरसी और एसजीआरसी की समस्याओं का भी अति शीघ्र निवारण होना जरूरी है।
डॉ. राकेश गुप्ता ने पत्र में कहा है कि उपरोक्त मुद्दे तो बस “हिमशैल का एक छोटा सा हिस्सा” हैं। ऐसे कई मुद्दे हैं जिनके कारण अस्पतालों के लिए इस योजना के तहत मरीजों का इलाज करना लगभग असंभव हो गया है, जब तक कि सरकार द्वारा इन चिंताओं के समाधान के लिए आपसी संवाद से सुधारात्मक उपाय नहीं किए जाते। डॉ. गुप्ता ने केंद्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण और राज्य के स्वास्थ्य विभाग से मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करने और इस समस्या के समाधान का अनुरोध किया है।

