EXCLUSIVE – माना सिविल अस्पताल में वेंटिलेटर और बेड कबाड़: मरीजों को नहीं मिल रहा लाभ, मेकाहारा रेफर
बिप्लव दत्ता….
रायपुर: माना सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का एक गंभीर मामला सामने आया है। अस्पताल में कई वेंटिलेटर मशीनें और बेड अनुपयोगी अवस्था में पड़े हैं और कबाड़ हो रहे हैं, जिसके कारण जरूरतमंद मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि गंभीर मरीजों को अक्सर मेकाहारा (डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय) रेफर कर दिया जा रहा है, जिससे न केवल मरीजों को परेशानी हो रही है, बल्कि मेकाहारा पर भी अनावश्यक दबाव बढ़ रहा है।कोविड महामारी के दौरान माना सिविल अस्पताल को राज्य सरकार की ओर से यह महँगी वेंटिलेटर मशीनें उपलब्ध कराई गई थी।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सिविल अस्पताल में पर्याप्त संख्या में वेंटिलेटर और बेड उपलब्ध होने के बावजूद, उनका उपयोग नहीं हो पा रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन मशीनों के रखरखाव में कमी, तकनीकी खराबी, या फिर इन्हें चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी इसका मुख्य कारण हो सकती है। अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा उन गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें तत्काल जीवन रक्षक उपकरणों की आवश्यकता होती है।
मरीजों को हो रही परेशानी
वेंटिलेटर और बेड की अनुपलब्धता के कारण, गंभीर श्वसन संबंधी समस्याओं या अन्य आपातकालीन स्थितियों वाले मरीजों को सिविल अस्पताल से सीधे मेकाहारा भेज दिया जाता है। इस रेफर प्रक्रिया में न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि मरीज की स्थिति भी बिगड़ने का खतरा रहता है। कई बार गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस का इंतजार करना पड़ता है, और मेकाहारा पहुंचने तक उनकी हालत और बिगड़ जाती है। यह स्थिति मरीजों के परिजनों के लिए भी मानसिक और आर्थिक बोझ बढ़ा रही है।

मेकाहारा पर बढ़ता दबाव
सिविल अस्पताल से लगातार मरीजों के रेफर होने से पहले से ही मरीजों के बोझ से दबे मेकाहारा अस्पताल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। इससे मेकाहारा की सेवाओं पर भी असर पड़ रहा है, और वहां भी बेड तथा वेंटिलेटर की उपलब्धता एक चुनौती बन सकती है। यह स्थिति समग्र स्वास्थ्य प्रणाली के लिए चिंता का विषय है।

प्रशासन की चुप्पी और सवाल
इस पूरे मामले पर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी सवाल खड़े करती है। जब सरकार द्वारा करोड़ो रुपए की लागत से खरीदी गई मशीनें मरीज़ों की सेवा के लिए है, तो उन्हें सक्रिय स्थिति में क्यों नही रखा जा रहा है? ये 100 बिस्तर वाला सिविल अस्पताल है पर हाल बेहाल है , 10 बिस्तर भी ठीक से नही चल रहा है। इस गंभीर विषय पर सिविल अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। यह सवाल उठ रहा है कि आखिर क्यों इतनी महत्वपूर्ण जीवन रक्षक मशीनें कबाड़ हो रही हैं, और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। क्या प्रशासन ने इन मशीनों के रखरखाव और संचालन के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई है?इस मामले में तत्काल जांच और आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि सिविल अस्पताल में उपलब्ध संसाधनों का सही उपयोग हो सके और मरीजों को उचित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। स्वास्थ्य विभाग को इस ओर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न हो।

