मैनपाट में बीजेपी का ‘फूटू खाना फंडा’! मंत्री-सांसद उल्टी-दस्त में बेहाल, कांग्रेस बोली — “जनता की बद्दुआ लगी है”
मैनपाट – छत्तीसगढ़ की सियासत का सबसे बड़ा मज़ाक इन दिनों मैनपाट के बीजेपी प्रशिक्षण शिविर में देखने को मिला। तीन दिन तक रणनीति बनाने, सत्ता के समीकरण सेट करने और विपक्ष को गरियाने पहुंचे माननीय मंत्री, सांसद और नेता खुद ही ‘फूटू खाना’ कांड के शिकार हो गए।
जिन्हें प्रदेश संभालना था, वो उल्टी-दस्त संभालते दिखे।
कैसे बना ये ‘पेट-क्रांति‘
शिविर के दूसरे दिन दोपहर जैसे ही भोजन परोसा गया, नेताओं ने स्वाद लेकर थालियां साफ़ कीं। लेकिन चंद घंटे बाद ही पेट में ऐसा बवाल मचा कि कई माननीय इधर-उधर दौड़ते नजर आए। उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बेचैनी से पूरा शिविर हिल गया। हालत ये रही कि कुछ को टेंट के पीछे इमरजेंसी ट्रीटमेंट तक देना पड़ा।

कई नेताओं ने तो अपने गुप्तचरों को राजधानी फोन कर कहा — “भाई! अगली बार मैनपाट आने से पहले हाजमोला और ENO साथ रख लेना।”
कैटरर पर सवाल या संगठन का फेलियर?
अब सवाल ये कि आखिर इतने बड़े आयोजन में खाने की व्यवस्था किसकी थी? कैटरर की गलती थी या आयोजन समिति की लापरवाही? शिविर में बना भोजन न तो ठीक से स्टोर हुआ, न सही तापमान पर रखा गया। नतीजा — सत्ताधारी दल का पेट राजनीतिक मुद्दा बन गया।

सूत्र बता रहे हैं कि आयोजन की पूरी जिम्मेदारी जिन नेताओं पर थी, वो तो खुद ORS पीते हुए बिस्तर पकड़ कर लेटे हैं।
कांग्रेस का तगड़ा तंज — “जनता कर रही थी इंतज़ार, बद्दुआ ने कर दिया बीमार”
मामला गरमाया तो कांग्रेस ने भी चुटकी लेते हुए तंज कसा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा —
“जब जनता महंगाई, बेरोजगारी और अव्यवस्था से हलाकान है, तब मंत्री-सांसद मैनपाट में रंगरेलियां मना रहे थे। ये जनता की बद्दुआ ही है, जो आइसो आराम के बीच उल्टी-दस्त में आ गए। वैसे हम माननीयों की सेहत की फिक्र करते हैं, पर जांच ज़रूर होनी चाहिए कि कौन ‘फूटू खाना’ खिला गया।”
कांग्रेस ने तो यहां तक कहा कि
“बीजेपी के नेता मैदान में आए नहीं, और पेट ने मैदान मार लिया।”
बीजेपी में घबराहट — ‘शिविर से ज्यादा चर्चा खाने की’
बीजेपी के खेमे में इस घटनाक्रम के बाद घबराहट है। रणनीति बनाने पहुंचे नेता अब इमोडियम और इलेक्ट्रॉल के डोज़ पर बैठकर बैठक कर रहे हैं। आलाकमान भी नाराज़ बताया जा रहा है। मैनपाट शिविर के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है —
‘फूटू खाना किसने परोसा?’ और ‘भविष्य में बीजेपी की पेट नीति’ क्या होगी?

सियासी गलियारों में चर्चाएँ
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये ‘फूटू खाना कांड’ कई नेताओं की गद्दी भी हिला सकता है। चुनावी साल में ऐसी लापरवाही पर पार्टी हाईकमान का एक्शन तय माना जा रहा है।
अगली रणनीति — “हाजमोला साथ, संगठन मजबूत”
अब देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी इस फजीहत से कैसे उबरती है। अगली बार शायद रणनीति बैठक से पहले खाने के मेन्यू के साथ डॉक्टर ऑन कॉल और ORS पैकेट भी तय होंगे।

