राम मिलेंगे आश्रम में हरियाली का महाअभियान: पीपल-बरगद सहित 650 पौधों का रोपण, तीन वर्षों में पाँच वृक्षों से चार हजार पौधों तक पहुंचा आश्रम -डॉ. अशोक हरिवंश चतुर्वेदी
शिवरीनारायण – छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र शिवरीनारायण के समीप स्थित तेंदुआ धाम के राम मिलेंगे आश्रम में पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आश्रम परिसर में पीपल और बरगद जैसे जीवनदायी एवं धार्मिक महत्व वाले वृक्षों के साथ-साथ कदम, कॉनोकार्पस, आम तथा कटहल के कुल 650 पौधों का रोपण किया गया। इस अवसर पर आश्रम परिसर में श्रद्धा, सेवा और प्रकृति संरक्षण का अद्भुत संगम देखने को मिला।
आश्रम से जुड़े लोगों के अनुसार जनवरी 2023 में जहां परिसर में केवल पाँच वृक्ष मौजूद थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर लगभग चार हजार वृक्षों और पौधों तक पहुंच गई है। कुछ ही वर्षों में बंजर और खाली दिखने वाला क्षेत्र अब हरियाली की चादर ओढ़ चुका है। दूर-दूर तक फैले पौधे और विकसित हो रहे वृक्ष आश्रम की पर्यावरणीय सोच और सतत प्रयासों की गवाही दे रहे हैं।
तेंदुआ धाम स्थित राम मिलेंगे आश्रम महानदी, शिवनाथ और जोंक नदियों के त्रिवेणी संगम क्षेत्र के समीप स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह आश्रम न केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र बन रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के क्षेत्र में भी एक प्रेरणादायी मॉडल के रूप में उभर रहा है।
आश्रम के प्रमुख और प्रणेता डॉ. अशोक हरिवंश चतुर्वेदी लंबे समय से इस क्षेत्र में धार्मिक, सामाजिक और पर्यावरणीय गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। उनके मार्गदर्शन में आश्रम परिसर को हराभरा बनाने का अभियान लगातार चलाया जा रहा है। वृक्षारोपण को केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रकृति के प्रति कर्तव्य और आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य धरोहर के रूप में देखा जा रहा है।
आश्रम प्रबंधन का मानना है कि पीपल और बरगद जैसे वृक्ष भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखते हैं। ये वृक्ष न केवल पर्यावरण को संतुलित रखने में सहायक होते हैं, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी पूजनीय माने जाते हैं। वहीं आम, कटहल और कदम जैसे पौधे भविष्य में फल, छाया और जैव विविधता को बढ़ावा देंगे। कॉनोकार्पस सहित अन्य पौधों के रोपण से क्षेत्र की हरित संपदा और समृद्ध होगी।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भी इस अभियान की सराहना की है। उनका कहना है कि जिस तेजी से आश्रम परिसर में वृक्षों की संख्या बढ़ी है, वह पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है। वृक्षारोपण के साथ-साथ पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई और संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके कारण अधिकांश पौधे स्वस्थ रूप से विकसित हो रहे हैं।
धार्मिक गतिविधियों के साथ पर्यावरण संरक्षण का यह अनूठा प्रयास लोगों को प्रकृति से जोड़ने का कार्य कर रहा है। आश्रम आने वाले श्रद्धालुओं को भी पौधारोपण और वृक्ष संरक्षण के प्रति जागरूक किया जाता है। परिणामस्वरूप यह अभियान जनभागीदारी का स्वरूप ग्रहण करता जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और बढ़ते पर्यावरणीय संकट के दौर में ऐसे प्रयास समाज के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। एक ओर जहां आश्रम आध्यात्मिक शांति का संदेश देता है, वहीं दूसरी ओर प्रकृति संरक्षण का भी सशक्त उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
हरियाली, आध्यात्मिकता और सेवा के इस संगम ने राम मिलेंगे आश्रम को एक नई पहचान दी है। पाँच वृक्षों से शुरू हुई यात्रा का चार हजार पौधों तक पहुंचना न केवल एक उपलब्धि है, बल्कि यह संदेश भी है कि दृढ़ संकल्प और सतत प्रयासों से किसी भी स्थान को हराभरा और जीवनदायी बनाया जा सकता है।

