June 24, 2026

एनआईटी रायपुर में एआई सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का आगाज, डीपफेक और साइबर खतरों पर होगा मंथन

0
IMG-20260623-WA0010


रायपुर – राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की सुरक्षा, डीपफेक तकनीकों और स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के सुरक्षित उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला का सोमवार को भव्य शुभारंभ हुआ। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार की स्पार्क (SPARC) योजना के अंतर्गत आयोजित इस कार्यशाला का विषय “ब्रेकिंग एंड सिक्योरिंग एआई: एडवर्सेरियल अटैक्स, डीपफेक्स एंड हेल्थकेयर सिस्टम्स” रखा गया है। 22 से 26 जून 2026 तक चलने वाले इस कार्यक्रम में देश-विदेश के विशेषज्ञ, शोधकर्ता और विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में छत्तीसगढ़ पुलिस के स्पेशल डीजीपी गुरजिंदर पाल सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर एवं नेशनल स्पार्क कोऑर्डिनेटर डॉ. रबीब्रत मुखर्जी, एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रो. एन.वी. रमना राव, अमेरिका के सुनी पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट के डॉ. जाहिद अख्तर तथा ताइवान की नेशनल सन यात-सेन यूनिवर्सिटी के डॉ. अरिजीत कराती विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप सिंह सिसोदिया ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन, सरस्वती वंदना और पौधा भेंट के साथ हुआ। स्वागत उद्बोधन देते हुए डॉ. प्रीति चंद्राकर ने बताया कि कार्यशाला में देश और विदेश से पंजीकृत लगभग 100 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं, जिन्हें एआई सुरक्षा और उन्नत तकनीकों से जुड़े विशेषज्ञों के व्याख्यानों और तकनीकी सत्रों का लाभ मिलेगा।

अपने संबोधन में डॉ. दिलीप सिंह सिसोदिया ने कहा कि आज एआई जीवन के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है और वर्तमान समय की जटिल चुनौतियों का समाधान एआई आधारित नवाचारों एवं अनुसंधान के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने इस कार्यशाला को ज्ञान-विनिमय और शोध सहयोग का महत्वपूर्ण मंच बताया।

मुख्य अतिथि गुरजिंदर पाल सिंह ने एआई के तेजी से बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़ी चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डीपफेक, एडवर्सेरियल अटैक्स और साइबर अपराधों का स्वरूप लगातार बदल रहा है। ऐसे में केवल तकनीकी विकास ही नहीं, बल्कि सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद प्रणालियों का निर्माण भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में एआई के उपयोग के दौरान परिणामों के परीक्षण और सत्यापन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

डॉ. रबीब्रत मुखर्जी ने स्पार्क योजना को भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के बीच शोध एवं अकादमिक सहयोग का मजबूत माध्यम बताते हुए एनआईटी रायपुर की पहल की सराहना की। वहीं, निदेशक प्रो. एन.वी. रमना राव ने कहा कि एडवर्सेरियल अटैक्स और डीपफेक तकनीकें भविष्य की बड़ी चुनौतियां बनकर उभर रही हैं, विशेषकर स्वास्थ्य क्षेत्र में जहां डेटा में मामूली बदलाव भी गंभीर परिणाम ला सकता है। उन्होंने सुरक्षित और मजबूत एआई प्रणालियों के विकास को समय की आवश्यकता बताया।

अमेरिका से आए डॉ. जाहिद अख्तर और ताइवान के डॉ. अरिजीत कराती ने भी एआई की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं बहुआयामी शोध की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में कार्यशाला समन्वयक डॉ. नरेश कुमार नागवानी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और आयोजन समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त किया। यह कार्यशाला आने वाले दिनों में एआई सुरक्षा और जिम्मेदार तकनीकी विकास पर गंभीर विमर्श का महत्वपूर्ण मंच बनेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed