June 5, 2026

राष्ट्रीय कार्यशाला का वन मंत्री ने किया वर्चुअल शुभारंभ, विशेषज्ञों और वन अधिकारियों ने साझा किए अनुभव

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रायपुर – छत्तीसगढ़ में हाथियों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से आए वन्यजीव विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों और वन अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध राज्य है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में हाथियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में प्रदेश में हाथियों की संख्या लगभग 240 थी, जो बढ़कर वर्ष 2026 में करीब 450 तक पहुंच गई है।

मंत्री कश्यप ने कहा कि वर्तमान में हाथियों का विचरण सरगुजा, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर और दुर्ग संभाग के कई क्षेत्रों तक फैल चुका है। ऐसे में वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार जनभागीदारी, वैज्ञानिक प्रबंधन और सतत निगरानी के माध्यम से मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हाथियों के संरक्षण को लेकर दीर्घकालिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है। आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन तथा प्रशिक्षित मानव संसाधन के माध्यम से वन्यजीव प्रबंधन को और सुदृढ़ बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं अधिकारियों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी और व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराती हैं, जिससे संरक्षण प्रयासों को नई मजबूती मिलती है।

कार्यशाला में भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून, भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान बरेली तथा देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा वन अधिकारियों और पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसमें हाथियों की मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच, नमूनों के संरक्षण, परीक्षण की प्रक्रिया, शव प्रबंधन और स्वास्थ्य निगरानी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।

वन मंत्री केदार कश्यप ने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान और अनुभव प्रदेश में हाथियों के संरक्षण, उनकी सुरक्षा और प्रभावी प्रबंधन के लिए उपयोगी सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ वन्यजीव संरक्षण और वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में एक मजबूत मॉडल के रूप में उभर रहा है।

वनमंत्री केदार कश्यप ने सभी विशेषज्ञों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए जैव विविधता संरक्षण तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व की दिशा में और बेहतर कार्य करने के लिये प्रेरित किया।

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