संस्कारों की पाठशाला में चमके माना के बच्चे, कालीबाड़ी में दिखा प्रतिभा और संस्कृति का संगम
रायपुर– बंगाली समाज छत्तीसगढ़ की पहल पर रायपुर स्थित बंगाली कालीबाड़ी में आयोजित पांच दिवसीय बाल संस्कार पाठशाला में बच्चों का उत्साह और सहभागिता देखने लायक रहा। इस विशेष आयोजन में रुद्र नृत्य कला निकेतन, माना के बच्चों ने भी महत्वपूर्ण भागीदारी निभाते हुए अपनी प्रतिभा, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
संस्कार, संस्कृति और व्यक्तित्व विकास को केंद्र में रखकर आयोजित इस पाठशाला का उद्देश्य बच्चों को केवल शैक्षणिक ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें नैतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी सशक्त बनाना था। कक्षा पहली से सातवीं तक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया।
पाठशाला के दौरान बच्चों को सामान्य ज्ञान, व्यक्तित्व विकास, आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्य, महान नेताओं के जीवन, इतिहास एवं पर्यावरण जागरूकता, समय प्रबंधन, बंगाली संस्कृति के संरक्षण, रोचक कहानी सत्र तथा सार्वजनिक भाषण और एंकरिंग कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।

रुद्र नृत्य कला निकेतन, माना के बच्चों ने पूरे कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों ने सांस्कृतिक गतिविधियों, संवाद सत्रों और विभिन्न शिक्षाप्रद कार्यक्रमों में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। उनके उत्साह और अनुशासन की उपस्थित लोगों ने सराहना की। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों ने भी इस तरह की पहल को बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बेहद उपयोगी बताया।
आयोजकों का कहना है कि वर्तमान समय में बच्चों को मोबाइल और डिजिटल दुनिया के प्रभाव से निकालकर भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़ना आवश्यक है। इसी उद्देश्य को लेकर इस बाल संस्कार पाठशाला का आयोजन किया गया, ताकि नई पीढ़ी में अच्छे संस्कारों का विकास हो और वे भविष्य में समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकें।

पाठशाला के समापन अवसर पर बच्चों को प्रेरणादायक संदेश दिए गए और उन्हें जीवन में अनुशासन, समय प्रबंधन तथा सकारात्मक सोच अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। आयोजन के दौरान बच्चों को नाश्ते की भी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई, जिससे उनका उत्साह और बढ़ गया।
रुद्र नृत्य कला निकेतन, माना के बच्चों की सहभागिता ने कार्यक्रम को और अधिक जीवंत एवं आकर्षक बना दिया। उनकी प्रस्तुति और सक्रियता ने यह साबित किया कि संस्कार और संस्कृति से जुड़ी ऐसी पहलें बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

