माना कैम्प में नारी शक्ति अधिनियम को लेकर गरमाई राजनीति,नगर पंचायत परिषद ने पारित किया निंदा प्रस्ताव, कांग्रेस के खिलाफ तख्तियां लेकर प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ – रायपुर के माना कैम्प नगर पंचायत कार्यालय में आज नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर आयोजित विशेष सामान्य सभा ने स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया। बैठक की कार्यवाही शुरू होते ही परिषद में इस महत्वपूर्ण विधेयक पर गंभीर चर्चा हुई, जिसके बाद माहौल अचानक विरोध में बदल गया। कार्यवाही समाप्त होते ही नगर पंचायत के अध्यक्ष सहित पार्षदगण हाथों में तख्तियां लेकर कांग्रेस के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते नजर आए।

सभा में मुख्य रूप से 131वें संविधान संशोधन विधेयक, जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 के नाम से जाना जाता है, को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला गया। परिषद ने सर्वसम्मति से एक निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए आरोप लगाया कि इस जनहितकारी विधेयक को संसद में पारित नहीं होने देना महिलाओं के अधिकारों के प्रति गंभीर असंवेदनशीलता का प्रतीक है।
नगर पंचायत अध्यक्ष संजय यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि यह अधिनियम महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम हो सकता था, लेकिन राजनीतिक कारणों से इसे रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने के लिए ऐसे कानून बेहद जरूरी हैं।

उपाध्यक्ष के. ऐबू ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली पार्टी का यह रुख पूरी तरह विरोधाभासी है। उन्होंने इसे राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित कदम बताते हुए कहा कि इससे समाज में सकारात्मक बदलाव की गति धीमी पड़ती है।
बैठक में पार्षद लोकमति ठाकुर, नंदो बर्मन, उर्मिला चौहान, अंजना चौधरी, काजल मंडल, लीना साह, प्रेम कुमार मंडल और राखी मंडल सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस विधेयक के समर्थन में अपनी बात रखते हुए कांग्रेस के रवैये की आलोचना की।
पार्षदों ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, समानता और सशक्तिकरण का प्रतीक है। इसे पारित होने से रोकना उन लाखों महिलाओं की उम्मीदों पर चोट है, जो समाज में बराबरी का हक चाहती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के कदम से महिलाओं के प्रति नकारात्मक संदेश जाता है।
सभा के बाद हुए विरोध प्रदर्शन में पार्षदों और पदाधिकारियों ने तख्तियां लेकर कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान “महिला विरोधी मानसिकता बंद करो” और “नारी सम्मान का अपमान नहीं सहेंगे” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
नगर पंचायत के अधिकारियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया और विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। अधिकारियों ने माना कि महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान और प्रतिनिधित्व बढ़ाने वाले कानून समाज के समग्र विकास के लिए आवश्यक हैं।
यह पूरा घटनाक्रम न केवल स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे अब पंचायत स्तर तक गहराई से जुड़ चुके हैं। माना कैम्प की इस परिषद बैठक ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर अब स्थानीय निकाय भी मुखर भूमिका निभाने को तैयार हैं।
फिलहाल, इस निंदा प्रस्ताव और विरोध प्रदर्शन के बाद राजनीतिक माहौल और गरमाने के आसार हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं, जिससे यह साफ है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम अब केवल संसद तक सीमित विषय नहीं रह गया, बल्कि यह जन-जन की बहस का हिस्सा बन चुका है।

