थाने के सामने से जब्त मेटाडोर गायब! रायपुर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
छत्तीसगढ़ – रायपुर में चोरी का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने न सिर्फ आम लोगों को हैरान कर दिया है बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला ट्रैफिक थाना फाफाडीह का है, जहां थाने के ठीक सामने खड़ा जब्त मेटाडोर ही अज्ञात चोरों द्वारा पार कर दिया गया। यह घटना शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा सवालिया निशान लगा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, मेटाडोर क्रमांक CG 12 BH 3683 को 7 अप्रैल को ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के चलते जब्त किया गया था। बताया जा रहा है कि वाहन प्रतिबंधित मार्ग में प्रवेश कर गया था, जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 115/194 के तहत कार्रवाई करते हुए वाहन को जब्त कर लिया। कार्रवाई के बाद वाहन को ट्रैफिक थाना फाफाडीह के सामने ही खड़ा कर दिया गया था।
ट्रैफिक पुलिस ने मेटाडोर चालक को आवश्यक दस्तावेजों के साथ 8 अप्रैल की सुबह 11 बजे थाने में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। लेकिन निर्धारित समय पर चालक नहीं पहुंचा, जिसके चलते वाहन थाने के सामने ही खड़ा रहा। बताया जा रहा है कि यह मेटाडोर लगातार दो दिनों तक वहीं खड़ा रहा, लेकिन इस दौरान उसकी सुरक्षा को लेकर कोई विशेष इंतजाम नहीं किए गए।
हैरानी की बात यह है कि 9 और 10 अप्रैल की दरमियानी रात अज्ञात चोरों ने मौके का फायदा उठाते हुए थाने के ठीक सामने से ही मेटाडोर को पार कर दिया। इतनी बड़ी लापरवाही इस बात को दर्शाती है कि थाने के सामने खड़े जब्त वाहनों की निगरानी कितनी ढीली है। सवाल यह उठता है कि आखिर चोर इतनी आसानी से थाने के सामने से वाहन लेकर कैसे फरार हो गए और किसी को भनक तक नहीं लगी?
सूत्रों के मुताबिक, घटना के बाद पुलिस ने करीब दो दिनों तक अपने स्तर पर वाहन की तलाश की, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली तो आखिरकार मामला गंज थाना में दर्ज कराया गया। ट्रैफिक थाना फाफाडीह में पदस्थ सहायक उप निरीक्षक (ASI) केशरी कुमार साहू ने गंज थाना पहुंचकर अज्ञात आरोपी के खिलाफ चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई है।
घटना सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। पुलिस अब आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। इसके साथ ही वाहन की तलाश के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और वाहन बरामद कर लिया जाएगा।
लेकिन इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर जब्त वाहन थाने की निगरानी में सुरक्षित माने जाते हैं, लेकिन इस तरह की चोरी ने पुलिस की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाई है। यदि थाने के सामने खड़े वाहन ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर क्या भरोसा किया जा सकता है?
शहर में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई। क्या थाने के सामने पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं थी? क्या रात के समय गश्त नहीं की जा रही थी? या फिर इस घटना के पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है?
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है, लेकिन इस घटना ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा व्यवस्था में कहीं न कहीं बड़ी चूक जरूर हुई है। अब देखना यह होगा कि पुलिस कितनी जल्दी इस मामले का खुलासा कर पाती है और अपनी साख को बचा पाती है।

