कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने लोकसभा में उठाया प्राइवेट स्कूल माफिया का मुद्दा, फर्जी CBSE स्कूलों की जांच की मांग
नई दिल्ली/रायपुर– छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा आज लोकसभा में गूंजा, जब कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत ने प्रश्नकाल के दौरान राज्य में संचालित कथित फर्जी CBSE स्कूलों और प्राइवेट स्कूल माफियाओं का मामला जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले की गंभीर जांच कराने की मांग की।
सांसद महंत ने सदन में कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में ऐसे निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जो खुद को Central Board of Secondary Education (CBSE) से संबद्ध बताते हैं, लेकिन वास्तव में उनकी मान्यता संदिग्ध है। ऐसे स्कूल अभिभावकों और छात्रों को गुमराह कर रहे हैं और शिक्षा के नाम पर मोटी फीस वसूल रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इन स्कूलों में न केवल अत्यधिक फीस ली जा रही है, बल्कि सरकार द्वारा निर्धारित नियमों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। कई जगहों पर छात्रों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
सांसद ने यह भी कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस प्रकार की अनियमितताएं बेहद चिंताजनक हैं और इससे लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि ऐसे फर्जी संस्थानों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और दोषियों को दंडित किया जाए।
लोकसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए महंत ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई स्तरों पर इस समस्या को उजागर करने का प्रयास किया, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाई। ऐसे में अब उन्होंने संसद के माध्यम से इस गंभीर विषय को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है, ताकि प्रभावित छात्रों और अभिभावकों को न्याय मिल सके।
प्रदेश के कई अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मुद्दे को लेकर लंबे समय से आवाज उठाई है। उनका कहना है कि शिक्षा के नाम पर चल रहे इस “माफिया तंत्र” ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। महंगी फीस, अनियमित व्यवस्थाएं और मान्यता को लेकर भ्रम जैसी समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
सांसद महंत द्वारा लोकसभा में इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि केंद्र सरकार जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाएगी। यदि जांच होती है, तो प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और फर्जी स्कूलों पर लगाम लग सकेगी।
इस पहल के लिए प्रदेश के कई लोगों ने सांसद के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका मानना है कि यह कदम न केवल छात्रों के हित में है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को सुधारने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हो सकता है।

