July 24, 2026

छत्तीसगढ़ में ‘मोर गांव, मोर पानी – मोर तरिया’ अभियान को मिलेगा नया गति, आयुक्त तारण प्रकाश सिन्हा ने दिए सख्त निर्देश

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रायपुर – छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण और आजीविका सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘मोर गांव, मोर पानी – मोर तरिया’ महाअभियान को अब और प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारी तेज कर दी गई है। इसी कड़ी में आयुक्त, महात्मा गांधी नरेगा एवं संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) तारण प्रकाश सिन्हा ने राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आहूत कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि 1 अप्रैल से प्रारंभ होने वाले श्रममूलक कार्यों को समयबद्ध और योजनाबद्ध तरीके से धरातल पर उतारा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ‘मोर गांव, मोर पानी’ अभियान के तहत युक्तधारा पोर्टल का अधिकतम उपयोग करते हुए नए तालाब ‘नवा तरिया’ का निर्माण सुनिश्चित किया जाए। उनका कहना था कि यह पहल न केवल जल संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी संसाधनों का भी विकास होगा।

आयुक्त सिन्हा ने जोर देकर कहा कि राज्य के कई क्षेत्रों में जल संकट एक गंभीर समस्या बनती जा रही है, ऐसे में ‘नवा तरिया’ जैसे प्रयास भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि हर गांव में जल संरचनाओं का निर्माण कर वर्षा जल का अधिकतम संचयन किया जाए, जिससे भूजल स्तर में सुधार हो सके।

बैठक में ‘नवा तरिया – आय का जरिया’ पहल को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। इस योजना के माध्यम से ग्रामीणों को केवल जल संरक्षण ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी काम किया जाएगा। तालाब निर्माण के बाद मछली पालन, सिंचाई और अन्य गतिविधियों के जरिए ग्रामीणों को अतिरिक्त आय के अवसर उपलब्ध होंगे।

इस दौरान आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्यों में सामुदायिक सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि युवाओं, ग्राम समुदाय, महिला स्व-सहायता समूहों तथा पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के बिना इस अभियान को सफल बनाना संभव नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से महिला समूहों की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि उन्हें योजना के क्रियान्वयन में प्राथमिकता दी जाए।
बैठक में राज्य स्तर के विभिन्न विभागों के अधिकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा सभी जिलों के एपीओ (असिस्टेंट प्रोग्राम ऑफिसर) उपस्थित रहे। सभी से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस अभियान को जन-आंदोलन का रूप दें और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ें।

अंत में आयुक्त सिन्हा ने स्पष्ट किया कि इस अभियान की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संरक्षण का मजबूत आधार तैयार करने का प्रयास है।

‘मोर गांव, मोर पानी – मोर तरिया’ अभियान के माध्यम से छत्तीसगढ़ सरकार ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि वह ग्रामीण विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। आने वाले समय में यह अभियान राज्य के गांवों की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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