वन विभाग का बड़ा खेल: डिप्टी रेंजर ने कटवाए 1000 पेड़, अवैध खनन और सड़क निर्माण से मचा हड़कंप
छत्तीसगढ़ – धमतरी जिले के मगरलोड ब्लॉक अंतर्गत ग्राम सोनपेरी से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग के डिप्टी रेंजर पर एक साथ कई गंभीर आरोप लगाए हैं, जिनमें 1000 पेड़ों की अवैध कटाई, बिना अनुमति के सड़क निर्माण और खुलेआम मुरुम का अवैध खनन शामिल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वन परिक्षेत्र मोहंदी के डिप्टी रेंजर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राजस्व और वन भूमि पर मनमानी कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला मगरलोड ब्लॉक के गंजीनमार क्षेत्र का है, जहां करीब 75 एकड़ जमीन राजस्व विभाग के अंतर्गत आती है। इसी जमीन पर बिना किसी प्रशासनिक स्वीकृति के भारी मशीनों से खुदाई कर सड़क बनाई गई और बड़ी मात्रा में मुरुम का अवैध खनन किया गया।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पूरे काम के दौरान लगभग 1000 पेड़ों की बेरहमी से कटाई कर दी गई, जिसकी भनक तक स्थानीय ग्रामीणों को नहीं लगने दी गई। जब ग्रामीणों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने एकजुट होकर कलेक्टर और डीएफओ से शिकायत की।
मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टोरेट पहुंचे और ज्ञापन सौंपते हुए डिप्टी रेंजर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि बिना अनुमति के न केवल पेड़ों की कटाई की गई, बल्कि खेतों के किनारों को भी 5-5 फीट तक खोद दिया गया, जिससे किसानों की जमीन को भारी नुकसान हुआ है। इससे किसानों में भारी आक्रोश है।
शिकायतकर्ताओं में अशोक कुमार, पीतांबर, बालगोविंद, जीवराज कंवर, झाड़ूराम साहू समेत कई ग्रामीण शामिल हैं, जिन्होंने लिखित रूप से आरोप लगाए हैं कि पूरे मामले में नियम-कानूनों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए धमतरी डीएफओ श्रीकृष्ण कुमार जाधव ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने जांच टीम गठित कर तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। डीएफओ ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में डिप्टी रेंजर की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि, यह कोई पहला मामला नहीं है जब वन विभाग के अधिकारियों पर इस तरह के आरोप लगे हों, लेकिन इस बार आरोपों का स्तर बेहद गंभीर है। एक हजार पेड़ों की कटाई और अवैध खनन जैसी गतिविधियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी एक बड़ा खतरा हैं।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करता है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल ग्रामीणों की नजरें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

