छत्तीसगढ़ में नशे की जड़ें गहरी! दुर्ग-बालरामपुर के बाद रायगढ़ में अफीम की खेती का भंडाफोड़, सियासत गरमाई
रायगढ़ – छत्तीसगढ़ में नशे के काले कारोबार ने अब खतरनाक रूप ले लिया है। दुर्ग और बलरामपुर के बाद अब रायगढ़ जिले में अफीम की अवैध खेती का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तमनार थाना क्षेत्र के आमाघाट गांव में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब एक एकड़ में फैली अफीम की खेती का खुलासा किया है।
मामले में पुलिस ने झारखंड निवासी आरोपी मार्शल सांगा को गिरफ्तार कर लिया है, जो अपने ससुराल आमाघाट में रहकर इस अवैध खेती को अंजाम दे रहा था। जानकारी के मुताबिक, आरोपी की पत्नी सुषमा खलखो इसी गांव की रहने वाली है और इसी का फायदा उठाकर वह लंबे समय से यहां सक्रिय था। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर पूरे खेत को अपने कब्जे में ले लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है जब प्रदेश पहले से ही दुर्ग और बलरामपुर में सामने आए अफीम खेती के मामलों को लेकर चर्चा में है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने यह साफ कर दिया है कि राज्य में नशे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है और स्थानीय स्तर पर इसकी जड़ें मजबूत होती जा रही हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी मात्रा में अवैध खेती कैसे हो रही थी और प्रशासन को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
इस पूरे मामले ने प्रदेश की सियासत को भी गरमा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पहले ही दुर्ग और बलरामपुर के मामलों को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि छत्तीसगढ़ में सूखे नशे को संरक्षण दिया जा रहा है और यह सब सरकार की सरपरस्ती में हो रहा है।
बघेल ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा था कि प्रदेश में अफीम की खेती उनकी जानकारी और संरक्षण में ही हो रही है। अब रायगढ़ में हुए इस नए खुलासे के बाद उनके आरोपों को और बल मिलता दिख रहा है, जिससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म होने की संभावना है।
इधर, पुलिस का दावा है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर एंगल से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी अकेले इस धंधे में शामिल था या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। स्थानीय स्तर पर भी लोगों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध कारोबार की जड़ तक पहुंचा जा सके।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रदेश में एक के बाद एक सामने आ रहे इन मामलों के पीछे कौन है? क्या यह सिर्फ छोटे स्तर के अपराधी हैं या फिर कोई संगठित गिरोह पूरे राज्य में इस अवैध कारोबार को संचालित कर रहा है?
फिलहाल, रायगढ़ पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में नशे का जाल तेजी से फैल रहा है। अगर समय रहते इस पर सख्त लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।

