एआई की ताकत से बदलेगी कृषि शिक्षा और रिसर्च की तस्वीर, IGKV में 5 दिवसीय प्रशिक्षण सम्पन्न
रायपुर – कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) नई क्रांति लाने जा रहा है। इसी दिशा में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर में “कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग” विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। 16 से 20 मार्च तक आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर गहन मंथन और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इस प्रशिक्षण में विश्वविद्यालय से जुड़े 17 कृषि महाविद्यालयों के 85 सहायक प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और प्राध्यापकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षण और अनुसंधान में एआई टूल्स के प्रभावी उपयोग के माध्यम से गुणवत्ता में सुधार और कार्यक्षमता बढ़ाना रहा।

प्रशिक्षण के दौरान देश के प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT Bhilai, IIIT Naya Raipur, NIT Raipur, IIM Raipur, Hidayatullah National Law University, Guru Ghasidas Central University, ICAR-NARM Hyderabad तथा ICAR-NIBSM Baronda के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को एआई की आधुनिक तकनीकों और टूल्स का प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने किया, जबकि समापन समारोह में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक डॉ. प्रशांत कविश्वर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कृषि अनुसंधान और शिक्षण के लिए अत्यंत उपयोगी है, जिससे समय की बचत और गुणवत्ता में वृद्धि संभव है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एआई मानव बुद्धिमत्ता का विकल्प नहीं बल्कि सहायक उपकरण है, इसलिए इसका संतुलित उपयोग आवश्यक है।
समापन अवसर पर डॉ. ए.के. दवे, डॉ. अजय वर्मा, डॉ. अखिलेश त्रिपाठी सहित कई वरिष्ठ वैज्ञानिकों और शिक्षाविदों ने भी अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने जोर दिया कि एआई से प्राप्त आंकड़ों और सूचनाओं का उपयोग करने से पहले उनका सत्यापन बेहद जरूरी है, ताकि शोध और शिक्षण की विश्वसनीयता बनी रहे।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की संयोजक एवं कृषि संकाय की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे ने बताया कि इस कार्यक्रम को दो प्रमुख भागों में आयोजित किया गया। पहला भाग नव नियुक्त संकाय सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन था, जिसमें उन्हें विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली, नियमों और शैक्षणिक ढांचे से परिचित कराया गया। वहीं दूसरा भाग एआई आधारित प्रशिक्षण का था, जिसमें प्रतिभागियों को डेटा विश्लेषण, शोधपत्र लेखन, प्रस्तुतीकरण और संदर्भ प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक जानकारी दी गई।

प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि इस प्रशिक्षण से उनकी कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और एआई के विभिन्न पहलुओं को समझने में मदद मिली है। उन्होंने भविष्य में भी इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने की मांग की।
पांच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण में विशेषज्ञ व्याख्यान, प्रायोगिक सत्र और समूह चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक कृषि शिक्षा और अनुसंधान की नवीनतम प्रवृत्तियों से अवगत कराया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. आर.पी. कुजूर, डॉ. रामा मोहन सावू, डॉ. अन्नु वर्मा और डॉ. लक्ष्मी नरसिंहा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
कुल मिलाकर, यह प्रशिक्षण कार्यक्रम कृषि शिक्षा और अनुसंधान में एआई के समावेश की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है, जो आने वाले समय में कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदलने में अहम भूमिका निभाएगा।

