March 18, 2026

माना कैम्प के कांग्रेसी पार्षद गिरफ्तार,फर्जी वंशावली बनाकर करोड़ों की जमीन हड़पने का खेल उजागर,अभनपुर पुलिस की कार्यवाही

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रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता

छत्तीसगढ़ – रायपुर जिले के अभनपुर थाना क्षेत्र से जमीन फर्जीवाड़े का ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और जनता दोनों को हिला कर रख दिया है। ग्राम पचेड़ा में करोड़ों की जमीन हड़पने की साजिश का खुलासा होते ही पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए माना कैंप वार्ड-8 के पार्षद मनोरंजन मंडल को गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों और वंशा वाली के जरिए जमीन अपने नाम कराई और उसे बेच दिया।

इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश तब हुआ जब शिकायतकर्ता सरित बरई ने पुलिस को दस्तावेजों के साथ शिकायत सौंपी। जांच में सामने आया कि खसरा नंबर 70, रकबा 1.60 हेक्टेयर भूमि को लेकर सुनियोजित तरीके से जालसाजी की गई। पार्षद ने एक संदिग्ध मृत्यु प्रमाण पत्र के आधार पर खुद को जमीन का वारिस बताकर नामांतरण करवा लिया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस व्यक्ति की मृत्यु के आधार पर यह पूरा खेल रचा गया, उसके नाम में ही बड़ा फर्क निकला। दस्तावेज में “विष्णु पद मंडल” की मृत्यु 16 मार्च 1997 दर्शाई गई, जबकि असली भूमि स्वामी “विष्णु प्रसाद मंडल” है। नाम और पारिवारिक विवरण में स्पष्ट अंतर होने के बावजूद दस्तावेजों को मान्यता मिलना, पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

और यहीं से शुरू होता है असली खेल—साल 1997 में कथित मौत होने के बावजूद 28 साल तक कोई नामांतरण नहीं हुआ, लेकिन अचानक 2024 में यह प्रक्रिया पूरी हो जाती है। यह संयोग नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश का हिस्सा माना जा रहा है। सवाल उठ रहा है कि आखिर राजस्व विभाग ने बिना गहन जांच के ऐसे दस्तावेजों को कैसे स्वीकार कर लिया?

जांच में सामने आया है—प्रगति नगर पंडरी निवासी हामिदा खान और उनके पति नासिर खान के पास माना वार्ड 8 के आरोपी कांग्रेसी पार्षद मनोरंजन मंडल ने जमीन को करोड़ों के दामों में बेचन दिया है।। यानी पूरा नेटवर्क सक्रिय था, जो सरकारी दस्तावेजों के सहारे जमीन माफियागिरी चला रहा था।

अभनपुर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल गिरफ्तारी की और अब पार्षद से गहन पूछताछ जारी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ एक जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा रैकेट काम कर रहा हो सकता है। कई और लोगों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।

यह मामला केवल एक आपराधिक कृत्य नहीं, बल्कि सिस्टम की कमजोरियों की भी पोल खोलता है। जब जनप्रतिनिधि ही कानून का दुरुपयोग कर “जमीन माफिया” की भूमिका में उतर आएं, तो आम जनता की सुरक्षा और भरोसे पर सीधा सवाल खड़ा होता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस फर्जीवाड़े के पीछे छिपे सभी चेहरे बेनकाब होंगे? क्या राजस्व विभाग की जिम्मेदारी तय होगी? या फिर यह मामला भी कुछ समय बाद ठंडे बस्ते में चला जाएगा?

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अभनपुर थाना प्रभारी सत्येंद्र सिंह श्याम का कहना है कि शिकायतकर्ता सरित बरई माना निवासी के द्वारा एसडीएम कार्यालय में फर्जी दस्तावेजों के जरिए पचेड़ा के जमीन को फर्जी वंशावली के आधार पर अपने नाम में कराकर बेचने की शिकायत हुई थी l जिसकी जांच पड़ताल राजस्व विभाग के अधिकारियों के द्वारा की गई थी l जिसके आधार पर आरोपी माना निवासी वार्ड पार्षद मनोरंजन मंडल के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 338, 336(3), 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्यवाही की गई है। इस मामले में जुड़े हुए दास्तांवेजों की जांच पड़ताल जारी है जिसके आधार पर कई लोगों की गिरफ्तारी होने की संभावना है।


फिलहाल, अभनपुर का यह कांड साफ संकेत दे रहा है कि जमीन के खेल में ‘सफेदपोश’ चेहरे भी अब खुलकर सामने आने लगे हैं।

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