March 18, 2026

वीडियों : रायपुर में मौत का अस्पताल? गटर हादसे के बाद तड़पते रहे युवक — रामकृष्ण अस्पताल की लापरवाही से तीन की मौत, शहर में उबाल

0
Screenshot_20260317_232551_copy_800x463

रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता

छत्तीसगढ़ – राजधानी रायपुर से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था बल्कि सुरक्षा इंतजामों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गटर साफ करने के दौरान हुए जहरीले हादसे में तीन युवकों — अनमोल माझी (25), गोविंद सेन्द्रे (35) और सत्यम कुमार (22) — की जान चली गई। लेकिन इस घटना ने उस वक्त और भयावह रूप ले लिया, जब समय पर इलाज नहीं मिलने के आरोप सामने आए।

जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात करीब 8 बजे ये युवक गटर साफ करने के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आ गए। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत रेस्क्यू की कोशिश की और करीब 10 लोगों की टीम ने मिलकर घायलों को बाहर निकाला। हालत गंभीर होने पर उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां जो हुआ उसने पूरे सिस्टम की सच्चाई उजागर कर दी।

आरोप है कि घायलों को रामकृष्ण अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब 1 घंटे तक न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई जिम्मेदार मेडिकल स्टाफ। तीनों युवक इलाज के इंतजार में तड़पते रहे, लेकिन उन्हें समय पर प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल सका। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कई बार अस्पताल प्रबंधन को आवाज दी गई, लेकिन कोई सामने नहीं आया।

करीब 1 घंटे बाद अस्पताल के कुछ कर्मचारी पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। तीनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। सवाल यह उठता है कि अगर समय पर इलाज मिलता, तो क्या इनकी जान बच सकती थी?

घटना की सूचना पुलिस को दी गई, लेकिन पुलिस भी देरी से पहुंची। इसके बाद करीब 1 घंटे बाद SDRF की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान हर मिनट कीमती था, लेकिन सिस्टम की सुस्ती ने तीन जिंदगियों को खत्म कर दिया।

स्थानीय लोगों ने इस पूरे मामले में दोहरी लापरवाही का आरोप लगाया है — एक तरफ बिना सुरक्षा के गटर में उतारना, और दूसरी तरफ अस्पताल में समय पर इलाज न मिलना। लोगों का कहना है कि अगर सुरक्षा उपकरण दिए जाते और अस्पताल में डॉक्टर मौजूद होते, तो यह हादसा टल सकता था या कम से कम जानें बच सकती थीं।

घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश है। लोगों ने रामकृष्ण अस्पताल को बंद करने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो शहर बंद करने का आह्वान किया जाएगा। जनता का कहना है — “ये अस्पताल नहीं, मौत का घर बन चुका है।”

मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनका कहना है कि उनके अपने सिस्टम की लापरवाही की भेंट चढ़ गए। अब वे न्याय की मांग कर रहे हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई चाहते हैं।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि कैसे लापरवाही और अव्यवस्था आम लोगों की जान ले रही है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है — क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?

फिलहाल, रायपुर में गुस्सा उफान पर है और हालात कभी भी बड़े आंदोलन का रूप ले सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed