March 17, 2026

रायपुर में नगर पालिका पर ग्रामीणों का गुस्सा फूटा: मंदिर हसौद नगर पालिका में तालाबंदी, सीएमओ पूजा पिल्ले को हटाने की मांग

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रायपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगे मंदिर हसौद नगर पालिका परिषद में सोमवार को ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। लंबे समय से वार्डों की बुनियादी समस्याओं को लेकर अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने नगर पालिका कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

जानकारी के अनुसार, नगर पालिका परिषद मंदिर हसौद के कई वार्डों में सड़क, नाली, पेयजल, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि इन समस्याओं को लेकर वे कई बार नगर पालिका प्रशासन को लिखित और मौखिक शिकायत दे चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। लगातार अनदेखी और लापरवाही से नाराज ग्रामीणों ने आखिरकार आंदोलन का रास्ता अपनाया।

सोमवार सुबह बड़ी संख्या में ग्रामीण नगर पालिका कार्यालय पहुंचे और मुख्य गेट पर ताला लगाकर तालाबंदी कर दी। इसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं धरने पर बैठ गए और नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं, जो हाथों में तख्तियां लेकर अधिकारियों की कार्यशैली के खिलाफ आवाज बुलंद करती नजर आईं।

तालाबंदी के कारण नगर पालिका का पूरा कामकाज ठप हो गया। कार्यालय में आने वाले कर्मचारी और अधिकारी भी अंदर नहीं जा सके, जिससे दिनभर प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित रहीं। अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और स्थानीय प्रशासन की भी चिंता बढ़ गई।

प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि नगर पालिका में पदस्थ सीएमओ पूजा पिल्ले की कार्यशैली से वे बेहद नाराज हैं। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, जिससे लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका प्रशासन आम लोगों की समस्याओं के प्रति पूरी तरह उदासीन हो गया है।

ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की कि नगर पालिका मंदिर हसौद में पदस्थ सीएमओ पूजा पिल्ले के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और उन्हें यहां से हटाया जाए। उनका कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक समस्याओं का समाधान संभव नहीं है।

धरना-प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी भी दी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि जरूरत पड़ने पर वे चक्काजाम कर सड़कों पर उतरेंगे और बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से समस्याओं को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से शिकायत कर रहे थे, लेकिन जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें मजबूर होकर आंदोलन करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती।

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक अमला भी हरकत में आ गया है और मामले को शांत कराने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। अब देखना होगा कि नगर पालिका प्रशासन और जिला प्रशासन इस बढ़ते जनाक्रोश को कैसे संभालते हैं और ग्रामीणों की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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