“15 लाख नहीं मिले तो विधानसभा के बाहर आत्मदाह करूंगा!” – कथावाचक का मंत्री राजेश अग्रवाल पर बड़ा आरोप, सियासत में मचा हड़कंप
रायपुर – छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस वक्त सनसनी फैल गई जब कथावाचक डॉ. रामानुरागी महाराज ने राज्य के मंत्री राजेश अग्रवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए आत्मदाह की चेतावनी दे दी। कथावाचक का आरोप है कि उनसे धार्मिक कथा कार्यक्रम करवाने के बाद मंत्री ने तय की गई 15 लाख रुपये की राशि नहीं दी, जिसके चलते वे अब बेहद आहत और परेशान हैं।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो में कथावाचक डॉ. रामानुरागी महाराज सीधे तौर पर मंत्री राजेश अग्रवाल का नाम लेते हुए आरोप लगाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्हें कथा कार्यक्रम के लिए बुलाया गया था और पूरी श्रद्धा के साथ उन्होंने कार्यक्रम सम्पन्न कराया, लेकिन बाद में भुगतान को लेकर टालमटोल शुरू कर दी गई।
कथावाचक का कहना है कि उन्होंने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें हर बार आश्वासन ही मिला। आरोप है कि महीनों बीत जाने के बावजूद उन्हें 15 लाख रुपये का भुगतान नहीं किया गया। इससे नाराज होकर अब उन्होंने बेहद कठोर कदम उठाने की चेतावनी दे दी है।
वीडियो में कथावाचक कहते नजर आ रहे हैं कि अगर जल्द ही उन्हें उनका मेहनताना नहीं मिला तो वे छत्तीसगढ़ विधानसभा के बाहर आत्मदाह कर लेंगे। उनके इस बयान ने प्रदेश की सियासत में हड़कंप मचा दिया है।
वहीं दूसरी तरफ इस पूरे मामले पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कथावाचक के सभी आरोपों को पूरी तरह झूठा और निराधार बताया है। मंत्री का कहना है कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रची जा रही है और कुछ लोग इस मामले को तूल देकर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि इस वीडियो को कांग्रेस से जुड़े कुछ लोगों द्वारा वायरल किया गया है, ताकि राजनीतिक फायदा उठाया जा सके। उनका कहना है कि उन्होंने किसी भी तरह की राशि देने का कोई वादा नहीं किया था और यह पूरा मामला बेबुनियाद है। हालांकि इस विवाद के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दल भी इस मामले को लेकर सरकार पर सवाल उठाने लगे हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता धनंजय ठाकुर का कहना है कि यदि कथावाचक के आरोपों में सच्चाई है तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर लोग भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोग कथावाचक के समर्थन में नजर आ रहे हैं तो वहीं कुछ लोग मंत्री के पक्ष में भी बयान दे रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और ज्यादा तूल पकड़ सकता है, क्योंकि इसमें धार्मिक कार्यक्रम, पैसे का लेन-देन और राजनीति—तीनों का मिश्रण दिखाई दे रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कथावाचक के आरोपों में सच्चाई है या फिर यह सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है। लेकिन कथावाचक द्वारा दी गई आत्मदाह की चेतावनी ने प्रशासन और सरकार दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में इस विवाद पर क्या नया मोड़ आता है और क्या दोनों पक्षों के बीच कोई समाधान निकल पाता है या नहीं।

