March 6, 2026

हाईकोर्ट में प्राइवेट स्कूल संगठन की बड़ी हार, याचिका खारिज

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रायपुर – छत्तीसगढ़ के करीब 6200 सीजी बोर्ड मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा पांचवीं और आठवीं की एकीकृत/बोर्ड परीक्षा कराने के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा 5वीं और 8वीं की परीक्षा स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ही ली जाएगी। इन परीक्षाओं में पास–फेल का प्रावधान भी लागू रहेगा। यह व्यवस्था हिंदी और अंग्रेजी माध्यम—दोनों पर समान रूप से लागू होगी।

आरटीई संशोधन का हवाला

मामले की सुनवाई नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान हस्तक्षेप याचिकाकर्ता समाजसेवी विकास तिवारी ने दलील दी कि निजी स्कूल संगठन आरटीई कानून की पुरानी धाराओं का हवाला देकर अदालत को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने 16 दिसंबर 2024 को शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 16 में संशोधन कर दिया है, जिसके तहत कक्षा 5वीं और 8वीं में नियमित परीक्षा और असफल होने पर उसी कक्षा में रोके जाने का प्रावधान है।

फर्जी पाठ्यक्रम और अवैध वसूली के आरोप

विकास तिवारी ने आरोप लगाया कि सीजी बोर्ड की मान्यता लेकर कई निजी स्कूल वर्षों से सीबीएसई पाठ्यक्रम पढ़ा रहे थे और अभिभावकों से लाखों रुपये की अवैध वसूली की गई। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों और निजी स्कूल संचालकों की मिलीभगत के कारण सीजी बोर्ड मान्यता प्राप्त स्कूलों में निःशुल्क पाठ्य पुस्तकें वर्षों से वितरित नहीं हुईं। आरटीई के तहत पढ़ने वाले हजारों गरीब छात्रों को भी महंगी और फर्जी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया गया, जिससे ड्रॉपआउट की संख्या बढ़ी।

याचिका खारिज, कार्रवाई की मांग

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद निजी स्कूल संगठन की याचिका को खारिज कर दिया। विकास तिवारी ने फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी। उन्होंने जानकारी दी कि उन्होंने स्कूल शिक्षा विभाग के कुछ आईएएस अधिकारियों, अन्य अधिकारियों और 1784 निजी स्कूल संचालकों के खिलाफ जालसाजी व धोखाधड़ी के आरोप में थाना में आवेदन भी दिया है।

फैसले के बाद अब प्रदेश के सीजी बोर्ड मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में कक्षा 1 से 10 तक निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों का लाभ छात्रों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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