कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह का औचक निरीक्षण, स्कूलों में शिक्षा और मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता परखी
रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता
छत्तीसगढ़ – रायपुर जिले के धरसींवा क्षेत्र में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह का हालिया प्रवास प्रशासन की सकारात्मक और जनहितकारी कार्यशैली का उदाहरण बनकर सामने आया है। इस दौरान उन्होंने सेजबहार और कांदुल के शासकीय प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण कर न सिर्फ व्यवस्थाओं का जायजा लिया, बल्कि बच्चों, शिक्षकों और अधिकारियों से सीधे संवाद कर जमीनी हकीकत को समझा।

कांदुल स्कूल: बच्चों के साथ बैठकर चखा मध्यान्ह भोजन
कांदुल स्थित शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने जिला पंचायत सीईओ कुमार बिश्वरंजन के साथ स्वयं मध्यान्ह भोजन चखा। भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पौष्टिकता की बारीकी से जांच की गई। कलेक्टर ने रसोइयों और शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यान्ह भोजन योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक आहार देकर उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित करना है, और इसमें गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

उन्होंने विद्यालय भवन में चल रहे मरम्मत कार्यों की भी समीक्षा की और स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी निर्माण व सुधार कार्य तय समयसीमा में, पूरी गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएं, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके।
सेजबहार स्कूल: पढ़ाई पर खास फोकस
सेजबहार शासकीय प्राथमिक विद्यालय में कलेक्टर ने बच्चों की कॉपियां जांचीं और उनकी पढ़ाई के स्तर को परखा। उन्होंने बच्चों से सवाल-जवाब कर उनकी समझ और सीखने की प्रगति जानी। साथ ही विद्यार्थियों से स्कूल में मिलने वाली सुविधाओं और मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था के बारे में भी जानकारी ली।

कलेक्टर ने शिक्षकों को निर्देश दिए कि बुनियादी शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि बच्चों की नींव मजबूत हो और वे आगे की कक्षाओं के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
प्रशासन का साफ संदेश
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि प्राथमिक शिक्षा और बच्चों के पोषण से जुड़ी योजनाएं सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। इनमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। नियमित निरीक्षण, पारदर्शिता और जवाबदेही के माध्यम से स्कूलों की व्यवस्था को और बेहतर बनाया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर सकारात्मक असर
कलेक्टर के इस दौरे से न सिर्फ स्कूल प्रशासन और शिक्षकों का मनोबल बढ़ा, बल्कि बच्चों और अभिभावकों में भी विश्वास मजबूत हुआ है। धरसींवा क्षेत्र में यह निरीक्षण एक सकारात्मक संदेश के रूप में देखा जा रहा है कि जिला प्रशासन बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर और संवेदनशील है।

