ख़बर का असर | प्रशासनिक बर्बरता पर सरकार का कड़ा प्रहार, SDM सस्पेंड, हत्या में गिरफ्तारी
रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता
छत्तीसगढ़ – बलरामपुर जिला से सामने आए प्रशासनिक हिंसा के सनसनीखेज मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। अवैध उत्खनन रोकने के नाम पर ग्रामीणों के साथ कथित मारपीट और एक बुजुर्ग की मौत के मामले में राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए बलरामपुर के SDM करुण कुमार डहरिया को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही हत्या के मामले में गिरफ्तारी की कार्रवाई भी की गई है।
आधी रात का ऑपरेशन, खेत से लौटते ग्रामीण बने शिकार
घटना 16 फरवरी की देर रात करीब 2 बजे की बताई जा रही है। SDM करुण कुमार डहरिया सामरी के नायब तहसीलदार पारस शर्मा और प्रशासनिक टीम के साथ बॉक्साइट के कथित अवैध उत्खनन की सूचना पर क्षेत्र में पहुंचे थे। इसी दौरान खेत से घर लौट रहे तीन ग्रामीण—रामनरेश राम (62), अजीत उरांव (60) और आकाश अगरिया (20)—को रास्ते में रोक लिया गया।

ग्रामीणों और चश्मदीदों का आरोप है कि बिना किसी पहचान, पूछताछ या वैधानिक प्रक्रिया के अधिकारियों और टीम के सदस्यों ने लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। ग्रामीणों का साफ कहना है कि तीनों किसान हैं और उनका अवैध उत्खनन से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं था।
बुजुर्ग की मौत, गांव में उबाल
बताया जा रहा है कि मारपीट में गंभीर रूप से घायल 62 वर्षीय रामनरेश राम ने अस्पताल ले जाते समय दम तोड़ दिया। वहीं अजीत उरांव और आकाश अगरिया गंभीर रूप से घायल हैं, जिनका इलाज अभी जारी है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक के साथ-साथ जबरदस्त आक्रोश का माहौल है।
सरकार हरकत में, SDM निलंबित
मामला सामने आने के बाद ग्रामीणों के उग्र विरोध और प्रदर्शन को देखते हुए शासन पर दबाव बढ़ता गया। आखिरकार बुधवार को सरकार ने SDM करुण कुमार डहरिया को सस्पेंड कर दिया। इससे पहले उन्हें और उनके साथियों को हत्या के मामले में गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
“दोषी कोई भी हो, नहीं बचेगा”
बलरामपुर पुलिस अधीक्षक वैभव भयंकर ने कहा है कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घायलों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। उन्होंने दो टूक कहा—दोषी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
इंसाफ की मांग, जांच पर टिकी निगाहें
घटना के बाद ग्रामीण न्याय की मांग पर अड़े हैं। पूरे जिले की नजर अब जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है। यह मामला सिर्फ एक मौत का नहीं, बल्कि सत्ता और वर्दी के दुरुपयोग पर बड़ा सवाल खड़ा करता है—क्या प्रशासन जवाबदेह बनेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन हो जाएगा?

