शिक्षा व्यवस्था की शर्मनाक तस्वीर: बच्चों के हाथों में किताब नहीं, पानी की बाल्टियां
छत्तीसगढ़ – जांजगीर-चांपा जिले से सामने आया यह वीडियो पूरी शिक्षा व्यवस्था पर करारा तमाचा है। मामला अकलतरा ब्लॉक के शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला भैसतरा सबरिया डेरा का है, जहां पानी की व्यवस्था न होने पर मासूम बच्चों से पानी ढुलवाया जा रहा है।
वीडियो में साफ दिखता है कि नन्हे-नन्हे बच्चे भारी बाल्टियों में पानी भरकर स्कूल तक ला रहे हैं। जिन हाथों में कलम और कॉपी होनी चाहिए, उन्हीं हाथों में पानी की बाल्टियां थमा दी गई हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है।
अभिभावकों में गुस्सा, गांव में आक्रोश
घटना सामने आते ही ग्रामीणों और अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। उनका कहना है कि “अगर पानी नहीं है तो प्रशासन व्यवस्था करे, बच्चों से मजदूरी क्यों करवाई जा रही है?” लोगों का साफ कहना है कि इस तरह के काम से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है।स्कूल के प्रति डर और अरुचि पैदा होती है
कानून की खुली अवहेलना!
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों से ऐसा कार्य कराना शिक्षा का अधिकार अधिनियम और बाल अधिकारों का उल्लंघन है। स्कूल बच्चों के लिए शिक्षा का मंदिर है, मजदूरी का अड्डा नहीं।
अब तक कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि वीडियो सार्वजनिक होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या जिम्मेदारों को संरक्षण मिला हुआ है? या फिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
मांग: जांच हो, जिम्मेदारों पर हो सख्त कार्रवाई
स्थानीय लोगों की मांग है कि मामले की तत्काल जांच हो। दोषी शिक्षकों/अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।स्कूल में तुरंत पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में पानी, शौचालय और बुनियादी सुविधाओं की कमी कोई नई बात नहीं है, लेकिन इसका बोझ बच्चों पर डालना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं।
अब देखना यह है कि प्रशासन कागजी बयानबाजी करता है या सच में कार्रवाई। फिलहाल यह मामला पूरे इलाके में चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है।

