वीडियों: इलाज के नाम पर ज़हर!बस्तर के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज में खुलेआम कानून की हत्या, अस्पताल बना संक्रमण का कब्रिस्तान
रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता
जगदलपुर। बस्तर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल शहीद महेन्द्र कर्मा मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सामने आई तस्वीरें सिस्टम के मुंह पर तमाचा हैं। जिस अस्पताल को लोगों की ज़िंदगी बचाने का केंद्र होना चाहिए था, वही आज बीमारियां फैलाने का सबसे बड़ा अड्डा बन चुका है। अस्पताल परिसर में, खासकर पीएम कक्ष के पीछे, मानव अंगों के अवशेष, खून से सना बायो-मेडिकल कचरा, इस्तेमाल की गई सिरिंज, नुकीली वस्तुएं और सामान्य कचरा एक साथ खुले में फेंका जा रहा है।
यह दृश्य किसी लापरवाह मोहल्ले का नहीं, बल्कि राज्य सरकार द्वारा संचालित मेडिकल कॉलेज अस्पताल का है—जहां कानून, नियम और मानवता तीनों दम तोड़ चुके हैं।
लापरवाही नहीं, सीधा आपराधिक कृत्य
बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2016 के अनुसार संक्रमित कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण अनिवार्य है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के दिशा-निर्देशों के तहत खुले में संक्रमित कचरा फेंकना दंडनीय अपराध है, जिसमें जुर्माना और जेल दोनों का प्रावधान है। इसके बावजूद अस्पताल परिसर में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सवाल यह नहीं कि कानून क्या कहता है—सवाल यह है कि अस्पताल के भीतर कानून को किसने दफन कर दिया?
संक्रमण का टाइम बम, शहर पर सीधा खतरा
इस खुले संक्रमित कचरे से टीबी, निमोनिया, डायरिया, टिटनेस जैसी घातक बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ गया है। यह कचरा मिट्टी और भू-जल को जहरीला बना रहा है और हवा के जरिए संक्रमण फैला रहा है। रोज़ाना सैकड़ों मरीज, उनके परिजन और अस्पताल कर्मचारी यहां आते-जाते हैं। जो बीमार नहीं हैं, वे भी इस अव्यवस्था के कारण बीमार बनाए जा रहे हैं। यह सिर्फ अस्पताल की समस्या नहीं, बल्कि पूरे जगदलपुर शहर के स्वास्थ्य पर सीधा हमला है।
अनुरूप साहू, अधीक्षक — शहीद महेन्द्र कर्मा मेडिकल कॉलेज अस्पताल
यह सिर्फ कचरे की तस्वीर नहीं है—यह प्रशासनिक नाकामी, निगरानी तंत्र की मौत और जनस्वास्थ्य से खुले खिलवाड़ की तस्वीर है।

