राष्ट्रपति के नाम पर कानून की बलि! बस्तर पंडुम में नियम गायब, आदिवासियों की जान दांव पर
बस्तर / छत्तीसगढ़। आज छत्तीसगढ़ में कानून की खुली छुट्टी दिखाई दी। मौका था बस्तर पंडुम महोत्सव, जहां राष्ट्रपति द्रौपती मुर्मू के कार्यक्रम के नाम पर ट्रैफिक नियमों, सुरक्षा मानकों और आम जनता की जान को सरेआम कुचल दिया गया।
भव्यता दिखाने की होड़, सुरक्षा की कोई चिंता नहीं
कार्यक्रम को सफल और भीड़भाड़ वाला दिखाने के लिए बस्तर के आदिवासी इलाकों से लोगों को माला गाड़ियों और अन्य वाहनों में ठूंस-ठूंस कर लाया गया। ना वाहन क्षमता देखी गई, ना सुरक्षा—बस भीड़ चाहिए थी। यह दृश्य किसी संवैधानिक कार्यक्रम का नहीं, बल्कि राजनीतिक ताकत दिखाने की असंवेदनशील कोशिश जैसा था।

ओवरलोडिंगऔर पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी
दरअसल गाड़ियों में तय सीमा से कई गुना लोग,बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग खड़े होकर सफर करते दिखे।ट्रैफिक जाम और अराजकता
सब कुछ खुलेआम… लेकिन ट्रैफिक पुलिस सिर्फ तमाशबीन बनी रही।
आम दिन में चालान, आज “वीआईपी छूट”
वाहन चालकों का साफ कहना है कि “रोजाना पुलिस रोकती है, चालान काटती है, 500 रुपये एंट्री के नाम पर वसूली होती है। आज किसी को नहीं रोका गया… क्योंकि कार्यक्रम भाजपा का था।”

भाजपा के कार्यक्रम में पुलिस निष्क्रिय हो जाती है। अगर हादसा होता, तो जिम्मेदारी कौन लेता… क्या राष्ट्रपति के कार्यक्रम के नाम पर आदिवासियों की जान सस्ती हो गई…विडंबना यह है कि राष्ट्रपति स्वयं आदिवासी समाज से आती हैं, फिर भी उन्हीं आदिवासियों को असुरक्षित हालात में ढोया गया। बस्तर पंडुम महोत्सव ने आज छत्तीसगढ़ की कानून व्यवस्था का असली चेहरा दिखा दिया।

आपको बता दे कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आज बस्तर संभाग के मुख्यालय जगदलपुर में गरिमामय आगमन हुआ। वे यहां के ऐतिहासिक लालबाग मैदान में आयोजित होने वाले तीन दिवसीय संभाग स्तरीय बस्तर पण्डुम का शुभारंभ करने पहुंची हैं। मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति मुर्मू का राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आत्मीय स्वागत किया।

