शिक्षा विभाग का ‘राजमहल’ बना सरकारी दफ्तर! टेबल पर पैर, मोबाइल में व्यस्त लेखा पर्यवेक्षक- सिस्टम की खुली बेशर्मी!
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) छत्तीसगढ़ – मनेन्द्रगढ़ जिले के शिक्षा विभाग से सरकारी सिस्टम की असली तस्वीर सामने आई है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पदस्थ लेखा पर्यवेक्षक दिनेश प्रसाद शर्मा का एक ऐसा दृश्य सामने आया है, जिसने सरकारी कामकाज की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तस्वीर में साहब टेबल पर पैर रखे, मोबाइल फोन में मशगूल दिखाई दे रहे हैं। मानो यह जनता की सेवा का दफ्तर नहीं, बल्कि निजी ड्राइंग रूम हो।
बताया जा रहा है कि साहब सरकारी काम के “अत्यधिक बोझ” से इतने थक चुके हैं कि उन्हें दफ्तर में ही आराम फरमाना पड़ रहा है। जब अधिकारी ही इस तरह ‘आराम’ की मुद्रा में होंगे। तो फाइलें टेबल पर और पैर टेबल के ऊपर होंगे। इससे शिक्षा विभाग के कामों की रफ्तार क्या होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

यह वही शिक्षा विभाग है, जहां शिक्षक नियुक्ति, वेतन, पेंशन और स्कूलों से जुड़े महत्वपूर्ण काम महीनों तक अटके रहते हैं।ऐसे में लापरवाह अधिकारियों पर कोई कार्रवाई होगी… या फिर सिस्टम की ‘नींद’ ऐसे ही टेबल पर पैर पसारकर चलती रहेगी। अब जिम्मेदार अफसरों की ‘रॉयल ड्यूटी’ पर अब सवाल उठना लाज़मी है।
जनता की सेवा या निजी आराम
सरकारी कार्यालयों में अनुशासन, मर्यादा और जवाबदेही की बात की जाती है, लेकिन इस तस्वीर ने उन तमाम दावों की पोल खोल दी है।
जहां एक ओर शिक्षक, कर्मचारी और आम नागरिक अपने काम के लिए घंटों चक्कर काटते हैं, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी ‘रॉयल ड्यूटी’ के अंदाज़ में नजर आ रहे हैं।

