March 6, 2026

भूमाफिया बसंत अग्रवाल का खौफनाक नेटवर्क!यूथ आइकॉन की आड़ में ज़मीनों का खेल, जिलों–कस्बों तक फैले गुर्गे, FIR से मचा हड़कंप

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( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) रायपुर – छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भूमाफिया बसंत अग्रवाल का नाम एक बार फिर सनसनी के केंद्र में है। खुद को समाजसेवी, धार्मिक आयोजक और ‘यूथ आइकॉन’ बताने वाला बसंत अग्रवाल असल में ज़मीन के अवैध कारोबार का बड़ा चेहरा बन चुका है। आरोप है कि कम ज़मीन, लेकिन ज्यादा दलाल—यही इसकी पहचान बन चुकी है।
सूत्र बताते हैं कि बसंत अग्रवाल का नेटवर्क सिर्फ रायपुर तक सीमित नहीं, बल्कि कई जिलों और छोटे कस्बों तक फैला हुआ है, जहां उसके गुर्गे और सक्रिय दलाल ज़मीन कब्ज़ा, सौदेबाज़ी, दबाव और धमकी के ज़रिये काम कर रहे हैं।

समाज सेवा, कथा-वाचन और धर्म की आड़

जानकारी के मुताबिक, बसंत अग्रवाल समाज में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर धार्मिक कथा-वाचन, भव्य.. आयोजनों…तथाकथित समाज सेवा कार्यक्रम करवाता है, ताकि उसकी असली पहचान पर पर्दा डाला जा सके। नाम न छापने को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां कथा होती है, वहां कुछ ही समय बाद ज़मीन सौदों की गतिविधियां तेज़ हो जाती हैं।

पत्रकार को खुलेआम धमकी, रील बनाकर डराने की कोशिश

मामला तब विस्फोटक हो गया जब हाल ही में रायपुर में बसंत अग्रवाल के एक कथित गुर्गे ने सोशल मीडिया पर रील बनाकर एक युवा पत्रकार को खुलेआम धमकी दी। वीडियो में न सिर्फ दबंगई दिखाई गई, बल्कि यह संदेश देने की कोशिश भी की गई कि “जो हमारे खिलाफ बोलेगा, उसे अंजाम भुगतना पड़ेगा।”

वीडियो के वायरल होते ही राजधानी में हड़कंप मच गया। इसके बाद पीड़ित पत्रकार देवेश तिवारी ने सिविल लाइन थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिस पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है।

डर के साये में पत्रकारिता?

यह घटना सिर्फ एक पत्रकार को धमकी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला है। अगर सच दिखाने वालों को धमकाया जाएगा, तो आम नागरिक की आवाज़ कौन उठाएगा…
पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है और भूमाफियाओं पर सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

कार्रवाई होगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में?

एफआईआर दर्ज होना एक शुरुआत है, लेकिन असली परीक्षा अब पुलिस और प्रशासन की है। क्या बसंत अग्रवाल और उसके पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष जांच होगी? या फिर यह मामला भी रसूख और दबाव के आगे दम तोड़ देगा?

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