जनसंपर्क विभाग में ‘सुपर पावर’ अफसरों का राज!सरकार बदल गई, मुख्यमंत्री बदल गया…पर कुर्सी से नहीं हिले ‘कमीशनबाज’ मठाधीश अधिकारी
( रिपोर्ट – बिप्लव दत्ता ) रायपुर – छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग में आज जो चल रहा है, वह न सिर्फ प्रशासनिक विफलता है बल्कि सीधे-सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की साख पर हमला भी है। सरकार भाजपा की है, मुख्यमंत्री नया है, लेकिन जनसंपर्क विभाग अब भी पुराने सत्ता-संरक्षण में जकड़ा है…यह कोई रहस्य नहीं रहा कि जनसंपर्क विभाग में कुछ ऐसे अधिकारी हैं, जो वर्षों से एक ही कुर्सी पर जमे हुए हैं। कांग्रेस सरकार आई, चली गई… भाजपा सरकार आई, मुख्यमंत्री बदले… लेकिन ये अफसर जस के तस बने रहे। सिर्फ सीपीआर बदले गए, बाकी पूरा सिस्टम वही का वही है।
जनसंपर्क नहीं, ‘कमीशन संपर्क’ विभाग बन गया
सूत्रों के मुताबिक जनसंपर्क विभाग अब सरकार की योजनाओं का प्रचार करने के बजाय कमीशन, सेटिंग और एजेंसीबाजी का अड्डा बन चुका है। मुख्यमंत्री की योजनाएं ज़मीन पर नहीं दिख रहीं, लेकिन कुछ अधिकारियों की संपत्तियां तेज़ी से बढ़ती दिख रही हैं। किसी अफसर का होटल है, किसी का निजी हॉस्पिटल, तो किसी के पास राजधानी रायपुर में एक नहीं, कई-कई एकड़ ज़मीन है।
मुख्यमंत्री की छवि खराब करने में लगे अपने ही अफसर
जनसंपर्क विभाग मुख्यमंत्री का सबसे संवेदनशील विभाग होता है। यही विभाग सरकार की छवि बनाता है या बिगाड़ता है। आज हालात ऐसे हैं कि मुख्यमंत्री साय की ईमानदार और साफ छवि पर उनके ही विभाग के अफसर बट्टा बैठा रहे हैं। जनता तक योजनाओं की सही जानकारी नहीं पहुँच रही, लेकिन विज्ञापन, टेंडर और भुगतान में करोड़ों की गहमागहमी है।
भाजपा सरकार में तबादले क्यों नहीं?
जो अधिकारी कांग्रेस सरकार में जनसंपर्क चलाते रहे, उन्हें भाजपा सरकार में क्यों बचाया जा रहा है? आखिरकार क्या ये अफसर सरकार से ज़्यादा ताक़तवर हो गए हैं या फिर तबादलों पर भी ‘कमीशन’ की दीवार खड़ी है। या फिर कुछ अफसरों का निजी साम्राज्य.. अगर समय रहते इन मठाधीश अधिकारियों का तबादला नहीं हुआ, तो नुकसान सिर्फ विभाग का नहीं होगा…सीधा असर सरकार और मुख्यमंत्री की साख पर पड़ेगा।

