खबर का असर : जवाहर नवोदय विद्यालय के अध्यापक डी. के सिंह सस्पेंड, डिप्टी कमिश्नर ने किया सस्पेंड, आदेश कॉपी
रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित जवाहर नवोदय विद्यालय में एक अध्यापक द्वारा छात्रों पर किए गए ‘आतंक’ ने शिक्षा व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। अध्यापक डी.के. सिंह पर छात्रों से मारपीट करने और उन्हें जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगे हैं। मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि डी.के. सिंह को उनकी नई पोस्टिंग पर कार्यभार संभालने के दिन ही डिप्टी कमिश्नर ने निलंबित कर दिया है।

क्या है पूरा घटनाक्रम?
यह मामला तब सामने आया जब हॉस्टल में रहने वाले कुछ छात्रों ने अपने परिजनों को बताया कि उन्हें मोबाइल रखने के आरोप में बेरहमी से पीटा गया। छात्रों ने आरोप लगाया कि अध्यापक डी.के. सिंह ने उन्हें खुलेआम धमकी देते हुए कहा, “मैं अभी तक 26 छात्रों को निपटा चुका हूं, तुम 4 छात्रों को निपटाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।” इस धमकी से डरे हुए छात्रों ने किसी तरह अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी।
जब परिजन विद्यालय पहुंचे, तो उन्हें कथित तौर पर गुमराह किया गया और प्राचार्य लक्ष्मी सिंह ने भी मामले को दबाने की कोशिश की। उन्होंने मीडिया को भी कवरेज से रोका। परिजनों ने आरोप लगाया कि प्राचार्य समझौते का दबाव बना रही थीं, जबकि वे कानूनी कार्रवाई चाहते थे।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई: खबर का हुआ असर
मामले की गंभीरता को देखते हुए, खबरों के प्रकाशन और शिकायत के बाद प्रशासन हरकत में आया। रायपुर कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लेते हुए डी.के. सिंह को स्कूल से रिलीव कर दिया। इसके बाद, भोपाल स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने बच्चों के बयान और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर जांच की। जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया गया।
सबसे महत्वपूर्ण परिणाम यह रहा कि 2 सितंबर 2025 को सुबह जॉइन करने वाले डी.के. सिंह को उसी दिन शाम को निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई शिक्षा विभाग की ओर से एक कड़ा संदेश है कि बच्चों की सुरक्षा और उनके साथ होने वाली किसी भी हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षक की आपराधिक कुंडली और प्राचार्य पर लगे आरोप
मामले की जांच आगे बढ़ने पर डी.के. सिंह की कई आपराधिक गतिविधियों का भी खुलासा हुआ है:
हिंसा का इतिहास: उन पर पहले भी कई छात्रों के साथ मारपीट करने का आरोप है।
भू-माफियागिरी: सूत्रों के अनुसार, दुर्ग में बंदूक की नोक पर जमीन हड़पने और रायपुर में भी भू-माफियागिरी की शिकायतों में उनका नाम सामने आया है।
भ्रष्टाचार: सबसे गंभीर आरोप यह है कि डी.के. सिंह ने प्राचार्य लक्ष्मी सिंह के साथ मिलकर विद्यालय के कई टन स्क्रैप को औने-पौने दामों में बेचकर लाखों का गबन किया है।

