March 6, 2026

जवाहर नवोदय विद्यालय में अध्यापक का ‘आतंक’: छात्रों से मारपीट के बाद जान से मारने की धमकी,प्राचार्य ने मीडिया को रोका और दी धमकी, फोटो डिलीट करो तब छोड़ेंगे छात्रों को,परिजनों ने बच्चों को हॉस्टल से ले गए घर

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रायपुर – माना स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक अध्यापक डी.के. सिंह पर छात्रों के साथ मारपीट करने और उन्हें खुलेआम धमकाने का आरोप लगा है। इस घटना के बाद से चार छात्र दहशत में हैं और उनके परिजनों ने अध्यापक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

मोबाइल रखने पर मारपीट और जान से मारने की धमकी

जानकारी के मुताबिक, बीते दिनों अध्यापक डी.के. सिंह ने चार छात्रों को मोबाइल रखने के आरोप में बुरी तरह पीटा। मारपीट के बाद भी उनका गुस्सा शांत नहीं हुआ। छात्रों का आरोप है कि डी.के. सिंह ने उन्हें भरे क्लास में धमकाते हुए कहा, “मैं अभी तक 26 छात्रों को निपटा चुका हूं, तुम 4 छात्रों को निपटाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।” इस धमकी के बाद चारों छात्र गहरे सदमे में हैं। उन्होंने किसी तरह अपने परिजनों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद परिजन तुरंत विद्यालय पहुंचे।

प्राचार्य ने मीडिया को रोका, कार्रवाई से बचने का प्रयास

विद्यालय पहुंचने पर पीड़ित छात्रों के परिजनों को पहले अध्यापक देवांगन ने करीब दो घंटे तक गुमराह किया। बाद में जब परिजन आक्रोशित हो गए, तो विद्यालय की प्राचार्य लक्ष्मी सिंह मौके पर पहुंचीं और उन्हें समझाने का प्रयास किया। इसी दौरान, जब मीडिया को घटना की सूचना मिली और उनकी टीम कवरेज के लिए पहुंची, तो प्राचार्य लक्ष्मी सिंह भड़क गईं। उन्होंने मीडिया को परिसर में फोटो खींचने से रोका और धमकी दी कि जब तक फोटो डिलीट नहीं की जाएंगी, तब तक छात्रों को नहीं छोड़ा जाएगा।

प्राचार्य के इस व्यवहार ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि इतनी बड़ी घटना के पीछे कहीं न कहीं प्राचार्य का भी हाथ हो सकता है, क्योंकि वे घटना के बाद से लगातार मीडिया से बचती रही हैं।

कलेक्टर ने लिया संज्ञान, हाउस मास्टर पद से हटाए गए डी.के. सिंह

काफी गहमागहमी के बाद, छात्रों के परिजनों ने लिखित आवेदन प्राचार्य को सौंपा और अपने बच्चों को हॉस्टल से घर ले गए। विद्यालय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कलेक्टर के निर्देश पर अध्यापक डी.के. सिंह को उनके पद हाउस मास्टर से हटा दिया गया है।

इस गंभीर मामले को महिला बाल विकास विभाग ने भी संज्ञान में लिया है। जानकारी मिली है कि प्राचार्य लक्ष्मी सिंह को आज कलेक्टर के सामने बुलाया गया है। एक तरफ परिजन डी.के. सिंह पर कड़ी कानूनी कार्रवाई चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्राचार्य इस मामले को समझौते से सुलझाने की मांग कर रही हैं, जिससे उनके मंसूबों पर संदेह और भी गहरा हो गया है।

शिक्षक की ‘आपराधिक कुंडली’: बंदूक से धमकाना और भू-माफियागिरी

इस मामले की परतें खुलने के साथ ही डी.के. सिंह की कई आपराधिक गतिविधियों का खुलासा हुआ है:

हिंसा का पुराना इतिहास: यह पहली घटना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दो महीनों में डी.के. सिंह ने कम से कम 15 से अधिक बच्चों के साथ मारपीट की है। उनके आतंक से डरे हुए परिजन आज तक शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाए।

बंदूक के दम पर जमीन कब्जाना: दुर्ग में अपनी पिछली पोस्टिंग के दौरान, डी.के. सिंह पर भोले-भाले ग्रामीणों को ऊंचे ब्याज पर पैसा देकर और समय पर भुगतान न होने पर बंदूक की नोक पर उनकी जमीन कब्जाने का आरोप है।

रायपुर में भू-माफियागिरी: रायपुर में भी उनका दबदबा जारी रहा। डी.के. सिंह ने वीआईपी रोड में एक जमीन को हड़पने की कोशिश की थी, जिसके खिलाफ माना थाने में शिकायत दर्ज हुई और मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा। बाद में उन्होंने ‘सेटिंग’ करके मामले को रफा-दफा कर दिया।

शराब का आदि और स्टाफ से भी दुर्व्यवहार: सूत्रों से पता चला है कि डी.के. सिंह शराब के भी आदी हैं, और उनकी दबंगई से सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि स्कूल के अन्य शिक्षक और शिक्षिकाएं भी परेशान हैं।

विद्यालय के स्क्रैप में ‘महाघोटाला’

डी.के. सिंह पर सिर्फ बच्चों से मारपीट और भू-माफियागिरी का ही नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का भी गंभीर आरोप है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डी.के. सिंह ने प्राचार्य लक्ष्मी सिंह के साथ मिलकर विद्यालय के कई टन स्क्रैप को औने-पौने दामों में बेचकर लाखों का गबन किया है। इस खुलासे ने प्राचार्य की भूमिका को और भी सवालों के घेरे में ला दिया है।

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